यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इंसेफ्लाइटिस से बढ़ती मौतों पर बाल आयोग सख्त
गोरखपुर इंसेफ्लाइटिस से लगातार हो रही मौतों को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त हो गया

गोरखपुर
इंसेफ्लाइटिस से लगातार हो रही मौतों को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त हो गया है। इलाज व रोकथाम के उपायों के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से दोबारा जवाब-तलब किया है। जांच आख्या भेजने में देरी पर नाराजगी जताई है।
प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा को भेजे पत्र में कहा है कि इंसेफ्लाइटिस व जलजनित रोगों से भारी तादाद में मौतें हो रही हैं। ऐसे में शासन द्वारा मासूमों को बचाने तथा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में क्या उपाय किए गए हैं।
आयोग के रुख को देखते हुए प्रमुख सचिव ने गोरखपुर के डीएम को पत्र भेजकर पूरा विवरण मांगा है। डीएम ने सीएमओ से पूछा है। इससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। आनन-फानन जवाब देने की तैयारी चल रही है।
चूंकि ज्यादातर मौतें बीआरडी मेडिकल कालेज में ही हुई हैं, इसलिए सीएमओ ने इस संबंध में प्राचार्य को पत्र भेज मौतों की संख्या, इलाज व पुनर्वास के बारे में जानकारी मांगी है।
बता दें कि सिर्फ मेडिकल कालेज में इस साल अब तक इंसेफ्लाइटिस के 1914 मरीज भर्ती हो चुके हैं जिनमें से 498 की मौत हुई है। सिलसिला अब भी जारी है। बीते चौबीस घंटे में भी यहां तीन मरीज भर्ती किए गए जबकि एक अन्य की मौत हो गई। अब भी 40 मासूमों का इलाज चल रहा है।
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शासन के पत्र के बाद बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य व जिला अस्पताल के एसआइसी से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। मेडिकल कालेज से जवाब अभी तक नहीं आया है।
डा. एके पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी
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