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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 02, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जाना इंसेफ्लाइटिस मरीजों का हाल

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Published: Sun, 02 Oct 2016 02:04 AM (IST)

गोरखपुर : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा शनिवार को बीआरडी मेडिकल कालेज में भ

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गोरखपुर : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा शनिवार को बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती इंसेफ्लाइटिस के मरीजों से मिले और उनको मिल रही दवाओं व सुविधाओं की जानकारी ली।

नड्डा, केंद्रीय परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह, सांसद योगी आदित्यनाथ, शिवप्रताप शुक्ल व कमलेश पासवान सौ बेड के वार्ड में पहुंचे जहां इंसेफ्लाइटिस के मरीज भर्ती हैं। बेड संख्या 32 पर भर्ती बिहार की सात साल की अनु कुमारी, बेड संख्या 36 पर भर्ती कुशीनगर के बारह साल के मनीष तथा बेड संख्या 38 पर भर्ती महराजगंज के सात साल के तौफीक को देखा व उनके परिजनों से अस्पताल की तरफ से मिल रही दवाओं व सुविधाओं के बारे में पूछा। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री यहां शिलान्यास समारोह में भाग लेने के लिए चले गए। इस अवसर पर नगर विधायक डा.राधा मोहन दास अग्रवाल, बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा.राजीव मिश्र, नेहरू अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा.एके श्रीवास्तव, एडी हेल्थ डा.आरके तिवारी, सीएमओ डा.रवींद्र कुमार, बाल रोग की विभागाध्यक्ष डा.महिमा मित्तल सहित अनेक चिकित्सक व अधिकारी मौजूद थे।

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इंसेफ्लाइटिस से तीन और मौत

बीते चौबीस घंटे में बीआरडी मेडिकल कालेज में पंद्रह नए मरीज भर्ती किए गए जबकि तीन अन्य की मौत हो गई। नेहरू अस्पताल में भर्ती 101 मरीजों का इलाज चल रहा है। जिन तीन लोगों की मौत हुई है उनमें गोरखपुर की पांच साल की राबिया, सिद्धार्थनगर की छह माह की श्रद्धा तथा कुशीनगर के ढाई साल के विवेक शामिल हैं। भर्ती होने वालों में गोरखपुर, कुशीनगर व बिहार के दो-दो, सिद्धार्थनगर के तीन, कुशीनगर के छह मरीज शामिल हैं। इस साल एक जनवरी से अब तक बीआरडी मेडिकल कालेज में 1219 मरीज भर्ती हो चुके हैं जिनमें से 318 की मौत हुई है।

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झलकियां

..तो प्राचार्य को हटा न दीजिएगा

शिलान्यास समारोह में संबोधन के दौरान सदर सांसद योगी आदित्यनाथ ने बीआरडी मेडिकल कालेज के डाक्टरों व कर्मचारियों की मेहनत व लगन की तारीफ की। व्यवस्था सुधारने के लिए प्राचार्य डा.राजीव मिश्र की भी सराहना की। इसके बाद मंच पर बैठे चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह की तरफ मुखातिब होकर बोले प्राचार्य अच्छा काम कर रहे हैं, इसलिए तारीफ कर रहा हूं। कहीं इनको हटा न दीजिएगा। इसके बाद हाल में ठहाके गूंजने लगे। राधेश्याम सिंह भी मुस्कुरा दिए।

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आठ सुपर स्पेशलिटी विभाग होंगे

बीआरडी मेडिकल कालेज में खुलने वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आठ विभाग होंगे जिनमें कार्डियोलॉजी, कोर्डियोथोरेसिक सर्जरी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, कैंसर के मरीजों के लिए आंकोसर्जरी, गैस्ट्रोलॉजी, यूरोलॉजी व ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग शामिल हैं। 160 बेड होंगे, जिसमें आठ आइसीयू बेड शामिल हैं। आठ अत्याधुनिक आपरेशन थियेटर, एक कैथ लैब होगा। पीजी की अठारह सीटें बढ़ जाएंगी।

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योगी ने स्वास्थ्य विभाग पर किया तीखा प्रहार

सांसद योगी आदित्यनाथ के संबोधन में इंसेफ्लाइटिस का दर्द साफ झलका। बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कालेज के डाक्टरों की सराहना की, तो जिला अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर अव्यवस्था के लिए स्वास्थ्य विभाग पर तीखा प्रहार भी किया। कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टर व स्टाफ नहीं रहते, इंसेफ्लाइटिस के मरीजों की भर्ती तक नहीं होती। जिला अस्पतालों के आइसीयू शोपीस बने हुए हैं। वहां इंसेफ्लाइटिस के गंभीर मरीजों की भर्ती तक नहीं की जाती। ऐसे में इन अस्पतालों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तरफ से डाक्टर, स्टाफ के वेतन व संसाधनों के लिए बजट दिए जाने की जरूरत क्या है। स्वास्थ्य मंत्री से कहा कि विभाग का पूरा बजट मेडिकल कालेज को ही दिया जाए। यहां डाक्टरों, स्टाफ व संसाधनों की कमी है, इससे दूर करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के सामने यह मांगे भी उठाई-

-एम्स का निर्माण अविलंब शुरू किया जाए।

बीआरडी मेडिकल कालेज के बालरोग विभाग में पीजी की सभी सीटों मान्यता प्रदान की जाए

- एनएचएम के अंतर्गत इंसेफ्लाइटिस के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में मानव संसाधन तथा धनराशि मेडिकल कालेज को उपलब्ध करायी जाए

-इंसेफ्लाइटिस के मरीजों की संख्या को देखते हुए इंसेफ्लाइटिस का नया वार्ड बनाया जाए

- बीआरडी मेडिकल कालेज में नवजात शिशुओं के लिए नया एनआइसीयू बनाया जाए

- मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर की व्यवस्था ठीक ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है। इसे ए ग्रेड का बनाया जाए। केंद्र सरकार इसे अपने हाथ में लेकर संचालित करे।

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स्वास्थ्य केंद्र पर मुर्गी पालन

एक स्वास्थ्य केंद्र की चर्चा करते हुए सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वह अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचे तो वहां कोई डाक्टर नहीं था। पूछा तो पता चला कि छह डाक्टर तैनात हैं। जिस स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों का इलाज होना चाहिए वहां मुर्गी पालन हो रहा था।

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एनआइवी में एक्सपायर किट से जांच

योगी आदित्यनाथ ने बीआरडी मेडिकल कालेज परिसर स्थित नेशनल इंस्टीच्यूट आफ वायरोलॉजी में अव्यवस्था का मामला भी उठाया। कहा कि पहले व्यवस्था ठीक थी, लेकिन अब तो यहां एक्सपायर किट से जांच करने की बात सामने आ रही है।

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राधेश्याम ने गिनाई यूपी सरकार की उपलब्धियां

उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने कहा कि केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार साथ मिलकर स्वास्थ्य की दिशा में काम कर रही है। केंद्र ने एम्स निर्माण की घोषणा की तो हमने तत्काल इसके लिए जमीन मुहैया कराई। चार साल में यूपी सरकार ने गोरखपुर मेडिकल कालेज को चार सौ करोड़ रुपये दिए हैं। इंसेफ्लाइटिस से मृतकों को पचास हजार रुपये जबकि विकलांगों को एक लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। 2012 से पहले प्रदेश में सात सरकारी मेडिकल कालेज थे। इस समय तेरह मेडिकल कालेज हैं। पांच और खोले जा रहे हैं, तीन निर्माणाधीन हैं। ऐसे में कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में 21 मेडिकल कालेज हो जाएंगे जो कि बड़ी उपलब्धि है। मेडिकल कालेज में एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया द्वारा बनाए जाने वाले रैन बसेरे के लिए जमीन उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया।

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प्राचार्य ने एमसीआइ पर साधा निशाना

बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा.राजीव मिश्र ने बाल रोग विभाग में पीजी सीटों की मान्यता को लेकर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया पर निशाना साधा। कहा कि विभाग में पीजी की तीन जबकि पीजी डिप्लोमा की तीन सीटों पर पढ़ाई होती है, पर मान्यता सिर्फ पीजी की एक व डिप्लोमा की एक सीट की है। एमसीआइ ने निरीक्षण किया, उनसे कहा गया कि पीजी की सभी सीटों को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण किया जाए। एमसीआइ ने अनुरोध को ठुकरा दिया। कहा कि बाल रोग विभाग में पीजी की सभी सीटों की मान्यता के लिए संसाधन मौजूद हैं, इसके बावजूद मान्यता नहीं दी जा रही। जूनियर डाक्टर विभाग की रीढ़ है। इंसेफ्लाइटिस के इलाज के लिए उनकी आवश्यकता है। ऐसे में पीजी की सभी सीटों को मान्यता मिलनी चाहिए।

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प्राचार्य ने उठाई मांगे

- इंसेफ्लाइटिस के एक मरीज के इलाज पर तीस से चालीस हजार रुपये खर्च आता है। करीब दो हजार मरीज भर्ती होते हैं। आठ करोड़ रुपये का खर्च आता है। सरकार इसे उपलब्ध कराए।

- मानव संसाधन के लिए 14 करोड़ रुपये मांगे गए थे, आठ करोड़ मिल पाए, बचे हुए सात करोड़ दिए जाएं

- नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष के निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये दिए जाएं

- उत्तर प्रदेश सरकार रैन बसेरा के लिए भूमि उपलब्ध कराए।