यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बेकाबू इंसेफ्लाइटिस से इस साल भी 131 मौतें
गोरखपुर बीते 38 वर्ष से हर साल पूर्वाचल में सैकड़ों मासूमों को मौत की नींद सुला रही इंसेफ्लाइटिस इस

गोरखपुर
बीते 38 वर्ष से हर साल पूर्वाचल में सैकड़ों मासूमों को मौत की नींद सुला रही इंसेफ्लाइटिस इस साल भी भी बेकाबू है। अभी पूरी बरसात पड़ी है लेकिन अब तक 131 मौतें हो चुकी है। इसके बावजूद बचाव के उपाय नदारद हैं। इलाज के संसाधनों की कमी बनी हुई है।
गंभीर यह है कि पिछले वर्षो की तरह इस वर्ष भी गोरखपुर मंडल में बीमारी का कहर सबसे अधिक है। चाहे केंद्र हो या प्रदेश सरकार, बीमारी पर नियंत्रण में दोनों नाकाम साबित हो रहे हैं। इस साल अब तक पूर्वाचल के क्षेत्रों के 833 मरीज गोरखपुर मेडिकल कालेज व आसपास के जिला अस्पतालों में भर्ती हुए हैं, जिनमें से 133 की मौत हुई है। इसमें सें तीन-चौथाई से अधिक सिर्फ गोरखपुर मंडल के जिलों के हैं। मंडल से विभिन्न जिलों से 676 मरीज बीआरडी मेडिकल कालेज व जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जिनमें से 89 मौतें हुई हैं। जिलावार बात करें तो गोरखपुर जिले से भर्ती होने वाले 169 में से 38, देवरिया के 221 में से 12, कुशीनगर के 197 में से 30 तथा महराजगंज के 89 में से 9 मरीजों की मौत हुई है। पूर्वाचल के दूसरे हिस्सों को देखें तो बस्ती जिले से भर्ती होने वाले 13 में से 3, संतकबीरनगर के 32 में से 11 तथा सिद्धार्थनगर 33 में से 8 मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा बलरामपुर से भर्ती हुए 3 में से 1, मऊ के 6 में से 1 तथा बलिया के 2 में से 1 मरीज की मौत हुई है। आजमगढ़ से एक मरीज भर्ती हुआ जिसकी मौत हो गई। इसी तरह गोंडा के तीन मरीज इलाज के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती हुए हैं। इनके अलावा पड़ोसी राज्य बिहार से 62 मरीज मेडिकल कालेज में भर्ती हुए हैं जिनमें से 15 की मौत हुई है।
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इलाज के इंतजाम नाकाफी
सरकारें चाहे जो भी दावे करे पर इंसेफ्लाइटिस के इलाज के इंतजाम इस साल भी नाकाफी हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज तक में संसाधनों का अभाव है। यहां डाक्टर व दवाओं का अभाव तो है ही, बेडों तक की कमी है। एक बेड पर दो-दो मरीजों को रखना पड़ा रहा है।यहां तक कि स्वास्थ्य केंद्र भी बदहाल हैं। मरीजों की भर्ती तो दूर यहां जब भी मरीज पहुंचते हैं मौके पर डाक्टर व स्टाफ की मुश्किल से मिलते हैं।
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बचाव में भी लापरवाही
महामारी से बचाव के लिए भी बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन न तो सही तरीके से फागिंग हुई न साफ-सफाई। सूअरबाडे़ अब भी अपनी जगह कायम हैं। शुद्ध पेय जल के दावे भी खोखले हैं।
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साल मौतें
2015 474
2014 675
2013 497
2012 608
2011 655
2010 543
2009 568
2008 515
2007 547
2006 434
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चौबीस घंटे में तीन और मौतें
पूर्वाचल में इंसेफ्लाइटिस के मरीजों की भर्ती व मौतों का सिलसिला जारी है। बीते चौबीस घंटे में बीआरडी मेडिकल कालेज में नौ नए मरीज भर्ती किए गए जबकि तीन अन्य की मौत हो गई। नेहरू अस्पताल में भर्ती 82 मरीजों का इलाज चल रहा है।
जिन तीन लोगों की मौत हुई है उनमें मेहदावल संतकबीरनगर के चार साल के सचिन, कैम्पियरगंज गोरखपुर की तीन वर्षीय रजनी और दोहरीघाट के पंद्रह साल के सतेंद्र शामिल हैं। भर्ती होने वालों में कुशीनगर के तीन, बिहार के दो तथा गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया व सिद्धार्थनगर के एक-एक मरीज हैं।
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