यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 07, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विवाद में फंस गया इंसेफ्लाइटिस पर शोध
हेमन्त पाठक, गोरखपुर : पिछले साढ़े तीन दशक से इंसेफ्लाइटिस के दंश से कराह रहे पूर्वाचल को इससे निजात

हेमन्त पाठक, गोरखपुर : पिछले साढ़े तीन दशक से इंसेफ्लाइटिस के दंश से कराह रहे पूर्वाचल को इससे निजात दिलाने की दिशा में शुरू हुआ शोध बीच में ही ठप हो गया है। केंद्र सरकार ने पहली बार जापानी इंसेफ्लाइटिस पर काबू के लिए ऐसी पहल की थी। शोध किया जा रहा था कि मच्छरों को रोकने में कीटनाशक असरदार है या मेडिकेटेड मच्छरदानी। इसकी जिम्मेदारी इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के अंतर्गत कार्यरत वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर पांडिचेरी को सौंपी गई थी, लेकिन मच्छरदानी बांटने में विवाद के बाद यह काम बंद हो गया।
शुरुआत इस साल अगस्त महीने में बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित गोरखपुर जिले के तीन ब्लाकों से की गई। इसके लिए दो ब्लाकों भटहट व बेलघाट में कीट नाशकों का छिड़काव किया गया। कैम्पियरगंज ब्लाक में मेडिकेटेड मच्छरदानी देने का कार्य शुरू हुआ। शोध के सिलसिले में पांडिचेरी से तीन वैज्ञानिक डा. पी. जांबुलिंगम, डा. राजावेल व डा. गुनाशेखरन अगस्त में पहुंचे। लगातार तीन महीने तक संबंधित क्षेत्रों में कीटनाशक व मच्छरदानी के असर का अध्ययन करने की योजना बनी थी। निष्कर्ष के आधार पर पूरे पूर्वाचल में इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता। इसी को लेकर कैम्पियरगंज ब्लाक के गांवों में मच्छरदानी बांटने का काम शुरू हुआ। लक्ष्य रखा गया था कि पंद्रह अगस्त तक काम पूरा कर दिया जाए, ताकि इसके असर का अध्ययन करने के लिए तीन महीने का समय मिल जाए, पर ऐसा नहीं हुआ। मच्छरदानी बांटने के कुछ दिन बाद ही विवाद शुरू हो गया। नियमत: ऐसे घरों में मच्छरदानी बांटी जानी थी जिसमें पंद्रह साल के कम के बच्चे थे, पर मच्छरदानी के लिए मारामारी मच गई। जिस गांव में ढाई सौ परिवार चिंहित किए गए थे, वहां चार सौ मच्छरदानी बंटने के बाद भी लोगों की मांग जारी रही। प्रभावशाली लोगों ने भी अपने लोगों को मच्छरदानी दिलाने के लिए टीम पर दबाव बनाना शुरू किया। पंचायत चुनाव के मद्देनजर यह दबाव बढ़ गया। नतीजा शोध के नीयत से आई वैज्ञानिकों की टीम परेशान हो गई। ब्लाक के चार गांवों में मच्छरदानी के वितरण के बाद यह काम रोक लिया गया। बची हुई मच्छरदानी ब्लाक पर ही रखवा कर टीम लौट गई।
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बेहद कारगर है कीटनाशक व मच्छदानी
कीटनाशक (पायरीथ्रायड) का प्रयोग दक्षिण भारत के राज्यों में इंसेफ्लाइटिस के नियंत्रण में काफी कारगर साबित हो चुका है। पूर्वाचल में इसका छिड़काव पहली बार हो रहा है। मेडिकेटेड मच्छरदानी में डेल्टा मेथरीन नामक कीटनाशक का इस्तेमाल किया गया है जो मच्छरों को मारने में बेहद प्रभावी है।
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इंसेफ्लाइटिस पर शोध रोकने के संबंध में सीएमओ व संबंधित अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जो भी दोषी होंगे, कारवाई होगी।
-डा. आरके तिवारी, अपर निदेशक स्वास्थ्य
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