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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 08, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दम तोड़ते रहे मासूम, सोते रहे अफसर

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Published: Tue, 08 Sep 2015 02:14 AM (IST)

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज के सौ बेड के अत्याधुनिक वार्ड में इंसेफ्लाइटिस व दूसरी गंभीर बीमारियो

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गोरखपुर

बीआरडी मेडिकल कालेज के सौ बेड के अत्याधुनिक वार्ड में इंसेफ्लाइटिस व दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मासूमों के इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आइसीयू के दो केबिन में चार दिन के भीतर कमजोर बैट्री बैकअप व तकनीकी गड़बड़ी वाले वेंटीलेटर पर रखे गए पंद्रह मासूमों ने एक के बाद एक तड़पकर दम तोड़ दिया। जबकि वहां इलाज कर रहे डाक्टर कालेज प्रशासन को यह लिखकर दे चुके थे कि दोनों केबिन में वेंटीलेटर न केवल गड़बड़ हैं बल्कि उनकी बैटरी भी खराब हो चुकी है। जेनरेटर से न जुड़े होने के चलते बिजली जाते ही वेंटीलेटर ठप हो जा रहे हैं, जिससे उन पर रखे गए गंभीर मरीजों की जान को खतरा है। डाक्टरों ने यह लिखकर भी दे दिया था कि यदि कोई मौत होती है तो वह उसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इसके बावजूद कालेज प्रशासन पर असर नहीं हुआ।

25 से 28 अगस्त तक चार दिन में सिर्फ दो केबिन में पंद्रह मौत देख डाक्टर कांप गए और उन्होंने दोबारा चेतावनी दी। यह तब है जब वार्ड में इंसेफ्लाइटिस के साथ अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मासूम वेंटीलेटर पर मौत से जंग लड़ रहे हैं।

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एम केबिन में चार दिन में मौतें

नाम तिथि

निशा, कुशीनगर 25 अगस्त

फरमान, संतकबीरनगर 25 अगस्त

नीता, गोरखपुर 25 अगस्त

रोहित, सिद्धार्थनगर 25 अगस्त

अभिषेक, बिहार 26 अगस्त

विपिन, गोरखपुर 27 अगस्त

अनिकेत 27 अगस्त

राज, सिद्धार्थनगर 27 अगस्त

समीर, देवरिया 28 अगस्त

गोपाल, सिद्धार्थनगर 28 अगस्त

अनन्ता, गोरखपुर 28 अगस्त

इसके अलावा एल केबिन में इस दौरान चार मौत हुई

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पहले जताई थी खतरे की आशंका

बाल रोग के विभागाध्यक्ष ने 19 जून 2015 को ही प्राचार्य को पत्र भेजकर कहा था कि सौ बेड के वार्ड में 17 वेंटीलेटर बैट्री बैकअप नहीं होने से सुचारू रूप से काम नहीं कर रहे हैं। इसके बाद कुछ दिन पहले तक कई बार इस संबंध में पत्र लिखा गया।

- लगातार हो रही मौतों से परेशान बाल रोग विभाग के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने 27 अगस्त को यह शिकायत की थी कि सौ बेड के वार्ड के कई वेंटीलेटर, मानीटर सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। एम केबिन में जेनरेटर से कनेक्शन नहीं होने से वेंटीलेटर बिजली जाने पर काम नहीं कर रहे हैं। यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो डाक्टर जिम्मेदार नहीं होंगे।

- डाक्टरों ने 28 अगस्त को एम वेंटीलेटर व मानीटर में गड़बड़ी, इन्फ्यूजन पंप व मैनपावर की कमी की बात कह कर खतरे की आशंका जताई थी।

- 28 अगस्त को डाक्टरों ने एल केबिन में बेड 29 व 30 पर लगे वेंटीलेटरों की बैटरी खराब होने व अन्य गड़बड़ी के बारे में जानकारी दी थी।

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छुपाते रहे सच

अव्यवस्था से मासूमों की लगातार मौतों के बावजूद कालेज प्रशासन व्यवस्था सुधारने की बजाय सच छुपाने में लगा रहा। पिछले दिनों मेडिकल कालेज के दौरे पर आए प्रमुख सचिव व विशेष सचिव को गड़बड़ी व कमियां बताने के बजाय कालेज प्रशासन ने सबकुछ ठीक-ठाक दिखाने की कोशिश की। पिछले दिनों डीएम के दौरे में जब मरीजों ने दवा न मिलने की शिकायत की तो सच कबूल करने के बजाय गुमराह करने की कोशिश की गई। जब सौ बेड के वार्ड के प्रभारी ने दवाओं की अनुपलब्धता व वेंटीलेटर का सच बताया तो उनको पद से हटा दिया गया।

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जिन वेंटीलेटर की बैटरी खराब थी, उनको बदल दिया गया है। तकनीकी गड़बड़ी दूर कर ली गई है। चार दिन पहले यह काम कराया गया। जहां तक जेनरेटर से कनेक्शन का सवाल है तो वार्ड के साथ जुड़े जेनरेटर की क्षमता कम होने से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।

डा. बीएन शुक्ला, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, नेहरू अस्पताल

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