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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दो महीने में बने इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन की योजना

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Published: Tue, 16 Dec 2014 10:39 PM (IST)

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : पूर्वाचल में इंसेफ्लाइटिस से लगातार हो रही मौतों को लेकर गंभीर राष्ट्री

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जागरण संवाददाता, गोरखपुर :

पूर्वाचल में इंसेफ्लाइटिस से लगातार हो रही मौतों को लेकर गंभीर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह दो महीने के भीतर बीमारी को जड़ से खत्म करने की कार्ययोजना बनाकर आयोग के सामने प्रस्तुत करे। साथ ही बीमारी की ठोस वजह भी तलाशी जाए।

आयोग ने मंगलवार को नई दिल्ली में इंसेफ्लाइटिस से लगातार हो रही मौतों के मामले में मानव सेवा संस्थान के निदेशक राजेश मणि द्वारा की गई शिकायत की सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के अधिकारियों को यह निर्देश दिए। आयोग के तलब करने पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार, महानिदेशक चिकित्सा व स्वास्थ्य तथा राज्य कार्यक्रम अधिकारी इंसेफ्लाइटिस पर अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई के दौरान मौजूद थे। अपराह्न चार से छह बजे तक हुई सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने इंसेफ्लाइटिस के बचाव व इलाज के लिए किए गए प्रयासों को एक-एक कर गिनाया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार इस बीमारी को लेकर बेहद गंभीर है। मरीजों के इलाज के लिए गोरखपुर व बस्ती मंडल में सौ से अधिक इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर खोले गए हैं तथा गठित टीमें लगातार इनकी मानिट¨रग कर रही हैं। इसके अलावा बीआरडी मेडिकल में सौ बेड का अत्याधुनिक वार्ड ऐसे मरीजों के इलाज के लिए स्थापित किया गया है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की गयी है। एक तरफ जहां बीमारी को लेकर आशा व एएनएम को प्रशिक्षित किया गया वहीं आम लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी किए गए। बीमारी से प्रभावित इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए इंडिया मार्क हैंडपंप भी लगाए जा रहे हैं। मच्छरों पर नियंत्रण के लिए गंबूजिया मछलियां तालाबों व जलजमाव वाली जगहों में छोड़ी गयीं। प्रदेश सरकार की पहल पर सेंटर आफ डिजीज कंट्रोल अमेरिका के वैज्ञानिकों की टीम ने बीआरडी मेडिकल कालेज, जिला अस्पतालों के साथ गांवों में जाकर बीमारी के कारणों व उनके इलाज के बारे में पड़ताल की। एम्स से विशेषज्ञों की टीम ने भी आकर मरीजों की जांच की।

आयोग ने अधिकारियों की बातें सुनने के बाद प्रयासों की सराहना तो की पर साथ ही कहा कि हर हाल में मौतें रुकनी चाहिए। इसके लिए बीमारी के जड़ से समाप्ति के लिए कार्ययोजना बनाकर दो महीने में प्रस्तुत की जाए। बीमारी की ठोस वजह भी पता की जाए।

उधर शिकायतकर्ता मानव सेवा संस्थान के निदेशक राजेश मणि ने भी आयोग के सामने कहा कि अभी भी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था लचर है। शुद्ध पेयजल के इंतजाम नहीं हैं। सूअरबाड़े अब भी आबादी में कायम हैं। बीमारी से विकलांग हुए लोगों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं है।