यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शिविर में उमड़ा पूर्वाचल का दर्द
जागरण संवाददाता, गोरखपुर तमकुहीराज निवासी ओम प्रकाश के नौ वर्षीय बेटे सुजीत को डेढ़ महीने पहले तेज

जागरण संवाददाता, गोरखपुर
तमकुहीराज निवासी ओम प्रकाश के नौ वर्षीय बेटे सुजीत को डेढ़ महीने पहले तेज बुखार हुआ। इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज पहुंचे। जांच में पता चला कि इंसेफ्लाइटिस है। इलाज से जान तो बच गई पर बीमारी अपने पीछे विकलांगता छोड़ गई।
सुजीत अब दिमागी रूप से कमजोर हो गए हैं। बोल नहीं पाते। बीमारी से बच्चे की पढ़ाई ठप हो गई है। पिता ओमप्रकाश बेटे के इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज में आयोजित शिविर में इस उम्मीद से पहुंचे थे कि शायद बेटे की जिंदगी कुछ सुधर जाए।
रामकोला कुशीनगर के साढ़े सात साल के आकाश को भी परिजन शिविर में इलाज के लिए ले आए थे। आकाश को पिछले साल इंसेफ्लाइटिस हुआ। बीमारी ठीक तो हो गई पर विकलांगता का दंश दे गई। आकाश की आवाज चली गई। दिमागी संतुलन बिगड़ गया है। चल भी नहीं सकते। पढ़ाई छूट चुकी है। शहर के निजामपुर निवासी साढ़े तीन साल के मो. समर की हालत भी कुछ ऐसी ही है। जब वह छह महीने के थे, इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित हुए। इलाज के बाद बच गए पर पैरों की ताकत चली गई। दिमागी रूप से कमजोर हो गए।
यह तो महज कुछ उदाहरण हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज में विभिन्न वर्ग के लोगों के समूह पहल के तत्वावधान में आयोजित शिविर में पहले दिन पूर्वाचल में विभिन्न जिलों से इंसेफ्लाइटिस के चलते विकलांग हुए 227 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे थे। यह सभी उनमें से थे जिनका इंसेफ्लाइटिस होने के बाद इलाज हुआ। बच भी गए। पर जिंदगी ऐसी मिली जो बोझ की तरह है। ज्यादातर का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है। कई की आवाज चल गई तो कई शारीरिक रूप से भी विकलांग हो चुके हैं। परिजन बच्चों की दुर्दशा देखकर व्यथित हैं। इलाज के लिए जगह-जगह दौड़ रहे हैं।
एक ही जगह मिली इलाज की सुविधा
सामान्य तौर पर इलाज के लिए मेडिकल कालेज आने पर मरीजों को विभिन्न विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों को दिखाने के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, पर शिविर में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक एक ही जगह उपलब्ध थे। यहां बाल रोग, मानसिक रोग, हड्डी, नेत्र विभागों के चिकित्सकों ने आए हुए लोगों को देखा। इसके अलावा मनोविकास केंद्र व कंपोजिट रीजनल सेंटर के विशेषज्ञ भी यहां मौजूद थे।
दिए गए प्रमाणपत्र
यहां आए विकलांगों का इलाज करने के अलावा उन बच्चों का विकलांगता प्रमाणपत्र भी दिए गए जिनके प्रमाणपत्र अभी नहीं बने थे। शिविर के आयोजक डा. वीके श्रीवास्तव के अनुसार इसके लिए विभिन्न जिलों के मेडिकल बोर्ड के सदस्य यहां मौजूद थे।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलेगी मुफ्त दवाएं
शिविर में जिन विकलांगों का इलाज हो रहा है उनको लिखी गई दवाएं संबंधित लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से मुफ्त मिलेंगी।
विकलांग बच्चे ने किया उद्घाटन
शिविर का उद्घाटन विकलांग बच्चे से कराया गया। उद्घाटन समारोह में पहुंचे मंडलायुक्त राकेश कुमार ओझा ने एक विकलांग बच्चे से शुभारंभ कराया। मंडलायुक्त ने शिविर के आयोजन को अनूठा प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के शिविर वर्ष में दो बार आयोजित होने चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकलांगों को उनके विकलांगता के अनुसार उपकरण देने की कोशिश की जाएगी। इस अवसर पर बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. केपी कुशवाहा, अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. डीएन त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक डा. कामेश्वर सिंह, शिविर के आयोजक डा. वीके श्रीवास्तव के साथ विभिन्न जिलों के सीएमओ व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
