यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बीमारी के वाहक मच्छरों के बारे में ली जानकारी
जागरण संवाददाता, गोरखपुर : पूर्वाचल में इंसेफ्लाइटिस के कारणों को तलाशने व पूरी स्थिति की समीक्षा

जागरण संवाददाता, गोरखपुर :
पूर्वाचल में इंसेफ्लाइटिस के कारणों को तलाशने व पूरी स्थिति की समीक्षा करने के सिलसिले में आई अमेरिकी विशेषज्ञों की टीम मंगलवार को बीआरडी मेडिकल कालेज पहुंची। टीम ने यहां केंद्र सरकार द्वारा इंसेफ्लाइटिस व दूसरी मच्छरजनित बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों की जानकारी लेने व उनके रोकथाम के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्थापित वेक्टर वार्न डिजीज सर्विलांस यूनिट का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों यहां पिछले वर्षो के अभिलेखों की पड़ताल की। जानकारी ली कि किस मौसम में किस तरह के मच्छरों की अधिकता होती है।
टीम के सदस्य डा. जेम्स सेजवार, डा. शाह हुसैन, डा. जगबीर सिंह करीब साढे़ तीन बजे सेंटर में पहुंचे। लगभग साढ़े चार बजे एक अन्य सदस्य डा. पद्मिनी श्रीकांत भी पहुंच गए। यहां विशेषज्ञों ने पिछले वर्षो के अभिलेखों को देख कर यह जानकारी ली कि किस मौसम में पूर्वाचल में किस तरह के मच्छरों की अधिकता होती है। जापानी इंसेफ्लाइटिस फैलाने वाले मच्छर किस महीने में बढ़ते हैं।
साल 2007 के बाद का अभिलेख देखकर यह जानकारी ली किस साल जापानी इंसेफ्लाइटिस के कितने मरीज आए हैं। जो मरीज बीमारी से प्रभावित हुए हैं किस उम्र के लोग हैं। कितने बच्चे या बच्चियां हैं। टीम ने सर्विलांस के तरीकों की भी जानकारी ली।
इसके पहले करीब दो बजे टीम अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय पहुंची। यहां अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. डीएन त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक डा. कामेश्वर सिंह के साथ बैठक की । विशेषज्ञों ने साल 2006, 2010 तथा साल 2014 में जापानी इंसेफ्लाइटिस की रोकथाम के लिए हुए टीकाकरण के अभिलेख देखे। नियमित टीकाकरण के दौरान लगाए जाने वाले इंसेफ्लाइटिस के टीकों के बारे भी पूछा।
