यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दावा टीकाकरण का और बढ़ गए जेई के मरीज
जागरण संवाददाता, गोरखपुर : पूर्वाचल में शत-प्रतिशत टीकाकरण के दावे के बीच जापानी इंसेफ्लाइटिस के

जागरण संवाददाता, गोरखपुर :
पूर्वाचल में शत-प्रतिशत टीकाकरण के दावे के बीच जापानी इंसेफ्लाइटिस के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज व दूसरे सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में से अबतक 83 लोगों में जेई की पुष्टि हो चुकी है। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
गोरखपुर-बस्ती मंडल में सबसे गंभीर स्थिति सिद्धार्थनगर जिले की है। यहां के 17 लोगों में जेई की पुष्टि हो चुकी है। दूसरे नंबर पर कुशीनगर है जहां बीमारी से अब तब 13 मरीज पीड़ित हुए हैं। इसके अलावा गोरखपुर, देवरिया व महराजगंज जिले के नौ-नौ, बस्ती में तीन, संतकबीरनगर व बलरामपुर के दो-दो, तथा आजमगढ़,मऊ, गोंडा व नेपाल के एक-एक मरीजों में जेई की पुष्टि हुई है। बीआरडी मेडिकल कालेज में इलाज के लिए पहुंचने वाले बिहार के मरीजों में से पंद्रह जांच के बाद जेई से पीड़ित पाए गए।
सरकार व स्वास्थ्य विभाग शुरू से ही यह दावा करता रहे हैं कि टीकाकरण से जापानी इंसेफ्लाइटिस पर काफी हद तक काबू कर लिया गया है। एक तरफ जहां अभियान चला कर टीकाकरण किया गया है वहीं रुटीन टीकाकरण में भी जापानी इंसेफ्लाइटिस के टीके लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद लगातार बढ़ रही जेई के मरीजों की तादाद ने अभियान को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
दो दिन में इंसेफ्लाइटिस से दस मौत
इंसेफ्लाइटिस के मरीजों की भर्ती व मौतों का सिलसिला जारी है। बीआरडी मेडिकल कालेज में पिछले दो दिन में अठारह नए मरीज भर्ती किए गए जबकि दस अन्य की मौत हो गई। नेहरू अस्पताल में भर्ती 207 मरीजों का इलाज चल रहा है।
जिन दस लोगों की मौत हुई है उनमें गोरखपुर की नौ वर्षीय पिंकी, पैंतीस वर्षीय सोनी शर्मा, चार साल के अभय, चार साल के प्रियांशु, दस साल के आशीष, तीन साल के अभय, छह साल के सनी, पांच वर्षीय रोशनी, तीन साल के अंकुश तथा मऊ की आठ साल की प्रियंका शामिल हैं। भर्ती होने वालों में गोरखपुर के पांच, कुशीनगर, महराजगंज व देवरिया के तीन-तीन, सिद्धार्थनगर व संतकबीरनगर के एक-एक तथा बिहार के दो मरीज हैं। इस साल पिछले एक जनवरी से अबतक बीआरडी मेडिकल कालेज में 1569 मरीज इलाज के लिए भर्ती हुए हैं जिनमें से 452 की मौत हुई है।
