यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 22, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जेई-एईएस के इलाज के लिए प्रशिक्षित किए गए डाक्टर

जागरण संवाददाता, गोरखपुर :
इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान इनको बीमारी की पहचान, मरीजों को ट्रांसपोर्ट करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी तथा स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के प्रोटोकाल के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षित किए गए डाक्टर अपने-अपने क्षेत्रों में इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर पर जाकर वहां डाक्टर, आशा व एएनएम को ट्रेनिंग देंगे।
डाक्टरों के साथ ही एडीशनल सीएमओ, जिला मलेरिया अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन व अंतराष्ट्रीय संस्था पाथ के सहयोग से दिया गया। इसमें जिलों के हर दूसरे स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों ने भाग लिया। उनको बीमारी के पहचान के साथ ही यह भी बताया गया कि यदि किसी मरीज को एंबुलेंस से रेफर किया जा रहा है तो इस दौरान क्या-क्या सावधानी बरती जाए। मसलन एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाते समय तेज हार्न बजाने, झटके से बचा जाए। मरीज को तेज रोशनी से बचाया जाए। तेज बुखार होने पर मरीज की आंखों पर पट्टी रखने के बारे में भी बताया गया। स्वास्थ्य केंद्रों पर इंसेफेलाइटिस के इलाज के प्रोटोकॉल के बारे में भी जानकारी दी गई।
