यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सीजन के पहले ही इंसेफेलाइटिस ने ली 57 जानें

गोरखपुर :
बरसात की बीमारी इंसेफेलाइटिस ने अब मौसम की सीमा तोड़ते हुए लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। मानसून के पहले ही बीमारी से पीड़ित होकर जहां 172 मरीज बीआरडी मेडिकल कालेज व अन्य अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं जिनमें से 57 की मौत हो चुकी है।
खास बात यह है कि इस बार देवरिया जिले में बीमारी का सर्वाधिक कहर देखा जा रहा है। हर बार भर्ती हुए मरीजों व मौतों की संख्या के मामले में यह जिला गोरखपुर व कुशीनगर के बाद तीसरे नंबर पर रहता था, पर इस बार मरीजों की संख्या के मामले में यह पहले नंबर पर है जबकि मौतों की संख्या को देखते हुए दूसरा जिला बन गया है। इस साल एक जनवरी से अब तक गोरखपुर मेडिकल कालेज व देवरिया जिला अस्पताल को मिलाकर देवरिया के पचास मरीज भर्ती किए गए हैं जिनमें से ग्यारह की मौत हुई हैं। गोरखपुर जिले के अठाइस मरीज भर्ती हुए हैं वहीं चौदह की मौत हुई है। कुशीनगर की बात करें तो यहां अबतक पचीस लोग बीमारी की गिरफ्त में आए हैं जिनमें से दस मौतें हुई। महराजगंज में भी हालात ठीक नहीं हैं। यहां से बाइस मरीज इलाज के लिए पहुंचे जिनमें से छह को बचाया नहीं जा सका।
अब तक भर्ती हुए 172 मरीजों में से हुई 57 मौतों में सर्वाधिक तादाद गोरखपुर मंडल की है। यहां के चार जिलों के जहां 125 मरीज भर्ती हुए हैं वहीं 41 मौतें हुई हैं। अन्य जिलों की बात करें तो बस्ती से अब तक भर्ती हुए छह मरीजों में दो की मौत हुई है। इसी तरह संतकबीरनगर के आठ में से एक तथा सिद्धार्थनगर से भर्ती ग्यारह में से दो की मौत हुई है। बलरामपुर के दो में से एक मरीज की मौत हुई है जबकि बलिया व नेपाल से भर्ती एक-एक मरीज को बचाया नहीं जा सका। गोंडा का भी एक मरीज मेडिकल कालेज में भर्ती हो चुका है। हर बार की तरह पड़ोसी राज्य बिहार से 17 मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं जिनमें से सात की मौत हुई है।
अब तक कोई जेई पाजिटिव नहीं
अब तक बीआरडी मेडिकल कालेज व दूसरे अस्पतालों में भर्ती हुए कुल मरीजों में 138 मरीजों के सेंपुल जांच के लिए भेजे गए। इसमें 114 की रिपोर्ट मिल गई है, पर किसी में भी जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है।
अधिकतर मेडिकल कालेज में भर्ती
शासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी बार-बार जहां जिला अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर इंसेफेलाइटिस के इलाज का दावा कर रहे हैं, पर इस बार भी ज्यादातर मरीज बीआरडी मेडिकल कालेज में ही भर्ती हुए हैं। इलाज के लिए पहुंचे 172 मरीजों में जहां 140 सिर्फ बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती हुए है वहीं 57 में 53 मौतें यहीं के मरीजों की हुई हैं। जिला अस्पतालों की बात करें तो गोरखपुर व कुशीनगर के जिला अस्पताल में अबतक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। जिला अस्पताल महराजगंज में एकमात्र मरीज भर्ती किया गया जिसकी मौत हो गई। सिर्फ देवरिया जिला अस्पताल में तीस मरीज भर्ती हुए हैं जिनमें से तीन की मौत हुई हैं। यहां अब भी पांच का इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं गया कोई मरीज
स्वास्थ्य केंद्रों पर इस साल भी मरीजों का विश्वास जमता नहीं दिख रहा है। अबतक किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर एक भी मरीज नहीं भर्ती किया गया है। डाक्टरों का समय से मौजूद नहीं रहना, रात्रि निवास नहीं करना अव्यवस्था इसकी मुख्य वजह बताई जाती है।
