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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आधी तबाही झेल रहे दो जिले

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Published: Fri, 20 Dec 2013 08:32 PM (IST)Updated: Fri, 20 Dec 2013 08:34 PM (IST)

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गोरखपुर : वैसे तो इंसेफेलाइटिस साढ़े तीन दशक से पूर्वाचल के लिए नासूर बना हुआ है पर दो जिलों पर बीमारी बेहद भारी पड़ रही है। एक-दो साल नहीं बल्कि डेढ़ दशक से भी अधिक समय से गोरखपुर व कुशीनगर जिले सर्वाधिक तबाही झेल रहे हैं। लगभग पचास फीसद मरीज इन्हीं दोनों जिलों से आते हैं।

इस बात की जानकारी छह साल पहले से केन्द्र व प्रदेश सरकारों को है। भारत सरकार की टीम द्वारा किये गये सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह बात सामने आ चुकी है। सर्वे में वर्ष 2001 से 2007 के अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से सर्वाधिक प्रभावित दस जिलों के बारे में अध्ययन किया गया था। इसमें बहराइच, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, लखीमपुर खीरी व सहारनपुर शामिल किये गये थे।

रिपोर्ट मिलने के बाद केन्द्र और प्रदेश सरकारों ने इन दोनों जिलों में बचाव के लिए कोई कदम नहीं उठाया। केन्द्र व प्रदेश सरकारों के भारी भरकम संसाधन इन जिलों में महामारी रोकना तो दूर इसे कम तक नहीं कर पाए। न तो कभी इन जिलों में महामारी के पहले फागिंग की गई, न सूअरबाड़े हटाए गए। टीकाकरण में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं। हाल के वर्षो में जलजनित इंसेफेलाइटिस के बढ़ते कहर के बावजूद इससे बचाव के कारगर उपाय नहीं किए गए। यहां लगाए गए इंडिया मार्क टू हैंडपंप की गहराई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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साल कुल भर्ती दो जिले

2001 826 434

2002 505 285

2003 806 100

2005 4752 2148 2006 2029 1075 2007 2790 1381 2008 2806 1523 2009 2663 1271 2010 3303 1652 2011 3769 1766 2012 3549 1703

2013 2948 1356

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देवरिया में भी गंभीर हो रहे हालात

लंबे समय से आधी तबाही झेल रहे गोरखपुर व कुशीनगर जिले में बीमारी पर काबू तो दूर अब गोरखपुर मंडल के देवरिया जिले में भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। बीते तीन वर्षो से यहां तस्वीर भयावह होती जा रही है। साल 2011 में देवरिया जिले के 723 मरीज भर्ती हुए जो इस साल मरीजों की तादाद के मामले में दूसरे नंबर पर रहे कुशीनगर से सौ कम हैं। 2012 देवरिया से 706 मरीज आए जो कि इस साल दूसरे नंबर पर रहे गोरखपुर जिले से 93 कम थे। हालांकि इस साल अभी दिसंबर बीतने पर ही तस्वीर साफ हो पाएगी पर अब तक की तो स्थिति है उसके हिसाब इस साल देवरिया जिले से आने वाले मरीजों की तादाद गोरखपुर के आसपास है। हालांकि मौतों की तादाद के लिहाज से गोरखपुर में देवरिया की तुलना में 41 मौतें अधिक हुई हैं।

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जापानी इंसेफेलाइटिस व जलजनित इंसेफेलाइटिस की जो वजहें हैं वह गोरखपुर व कुशीनगर में अधिक हैं। शायद यही वजह है यह जिले बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित हैं। देवरिया के भी हालात मिलते-जुलते हैं। सबसे अधिक जरूरत इस बात की है कि लोगों को बीमारी का वजह जैसे मच्छरों व दूषित जल के सेवन से बचाने के लिए जागरूक किया जाय।

डा. मिलिंद गोरे, निदेशक

नेशनल इंस्टीच्यूट आफ वायरोलॉजी गोरखपुर।

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