यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 06, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'मौतें कम करने' को बनी विशेषज्ञ समिति विवादों में फंसी

हेमन्त पाठक,गोरखपुर
उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर पूर्वाचल में इंसेफेलाइटिस से मौतें कम करने के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति शुरु में ही विवादों में फंस गई है। खुद भारत सरकार के महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डा. जगदीश प्रसाद ने समिति के गठन पर सवाल खड़ा कर दिया है। यूपी के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेजे पत्र में महानिदेशक ने कहा है कि समिति के गठन को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय से न तो राय ली गई है और न ही उसे जानकारी दी गई है।
यह हाल तब है जब महानिदेशालय के अंतर्गत कार्यरत नेशनल वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम इंसेफेलाइटिस के नियंत्रण व बचाव के लिए नोडल एजेंसी है। यही एजेंसी इंसेफेलाइटिस के नियंत्रण व बचाव के संबंध में न केवल योजनाएं बनाती है बल्कि कार्यक्रमों को लागू करने के लिए राज्यों को दिशा निर्देश भी जारी करती है। महानिदेशक ने यहां तक कहा है कि समिति में राज्य स्तर से कोई भी ऐसा सदस्य नहीं शामिल किया गया है जो पिछले वर्षो में इंसेफेलाइटिस नियंत्रण कार्यक्रमों की देखरेख से जुड़ा हो। इससे साफ है कि समिति में उचित प्रतिनिधित्व की कमी है।
महानिदेशक ने विशेषज्ञ समिति के समन्वय की जिम्मेदारी निभा रही संस्था पाथ को भी कठघरे में खड़ा किया है। कहा है कि जिस पाथ संस्था के टीम लीडर समन्वय कर रहे हैं, वह अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था है तथा कभी इंसेफेलाइटिस के चिकित्सकीय प्रबंधन से उसका कोई सरोकार नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक को जानकारी दिए बगैर पाथ संस्था को शामिल किए जाने को लेकर डीजी ने कहा है कि ऐसा करने से आगे चलकर यह कार्य विवाद में पड़ सकता है।
यूपी सरकार ने गठित की है विशेषज्ञ समिति:
पूर्वाचल में इस साल इंसेफेलाइटिस से बढ़ती मौतों से चिंतित प्रदेश सरकार ने मौतों की संख्या को कम करने के लिए हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. नागभूषण राव की अध्यक्षता में दस सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समन्वय की जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ पाथ के प्रीतू धलेरिया को सौंपी गई है। विशेषज्ञ समिति से कहा गया है कि वह गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिला अस्पतालों, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिए किए गए चिकित्सकीय प्रबंध की समीक्षा कर तीन महीने के भीतर अपने सुझाव प्रस्तुत करें।
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टीम गोरखपुर में कर चुकी पहली बैठक
विशेषज्ञ समिति बीते बीस नवंबर को को गोरखपुर मेडिकल कालेज पहुंची थी। टीम के सदस्यों ने बीआरडी मेडिकल कालेज के इंसेफेलाइटिस वार्डो में जाकर मरीजों की केस शीट देखी तथा दवाओं आदि के बारे में जानकारी ली। बीमारी के कारणों, इलाज, बढ़ी मौतों की वजह पर भी लंबी चर्चा की। इस पर जोर रहा कि टीकाकरण के साथ ही बीमारी से बचाव के अन्य क्या उपाय किए जाएं। इलाज की ऐसी व्यवस्था की जाय जिससे मौतों पर लगाम लगे।
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यह हैं समिति के सदस्य
- डा. पी नागभूषण राव, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद
- डा. केपी कुशवाहा, प्राचार्य व विभागाध्यक्ष बाल रोग, गोरखपुर मेडिकल कालेज
- डा. अनिल मिश्र, महाप्रबंधक, एनआरएचएम, उत्तर प्रदेश
- डा. पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय, उत्तर प्रदेश
- डा. मिलिंद गोरे, निदेशक,नेशनल इंस्टीच्यूट आफ वायरोलॉजी गोरखपुर
- डा. बीके रैना, परामर्शदाता, नेशनल वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम, नई दिल्ली
-डा. दीपिका सुर, वैज्ञानिक निदेशक पाथ
- डा. आनन्द राय, टेक्निकल आफिसर पाथ
- विनोद यादव, एडवोकेसी कंसलटेंट पाथ
- डा. प्रीतू धलेरिया, टीम लीडर पाथ
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