यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 06, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इंसेफेलाइटिस ने तोड़ा साढ़े तीन दशक का रिकार्ड

हेमन्त पाठक , गोरखपुर
रोकथाम के नाम पर पानी की तरह रुपये बहाने के बाद भी पूर्वाचल में इंसेफेलाइटिस की रफ्तार नहीं रुक पाई है। स्थिति यह है कि इस महामारी ने नवंबर माह में मरीजों की भर्ती के मामले में साढ़े तीन दशक के सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं। इस महीने में गोरखपुर मेडिकल कालेज व अन्य अस्पतालों में 509 मरीज भर्ती किए गए। 1978 में पूर्वाचल में बीमारी की दस्तक के बाद इतने मरीज नवंबर माह में कभी भर्ती नहीं हुए। इसी महीने में 108 जानें लेकर बीमारी ने पांच साल पुराना रिकार्ड भी तोड़ दिया है।
वैसे तो बीमारी बरसात के साथ दस्तक देती है और धीरे-धीरे इसकी रफ्तार बढ़ती है। आमतौर पर नवंबर माह आते-आते इसकी तेजी काफी हद तक कम हो जाती है। 2005 में बीमारी अपने भयावह रूप में थी। इस साल जहां 4752 मरीज भर्ती हुए थे वहीं 1135 मौतें हुई। इतनी अधिक तादाद में मरीजों की भर्ती व मौतों के बावजूद नवंबर में 275 मरीज ही भर्ती किए गए थे, जिनमें से 111 की मौत हुई थी। 2005 के बाद जलजनित इंसेफेलाइटिस पूर्वाचल में अपना पांव पसारने लगी और ठंड में भी मरीजों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। तब भी नवंबर में कभी इतनी भर्ती नहीं हुई। वर्ष 2007 में नवंबर महीने में बीमारी का कहर तेज था तब भी 457 मरीज ही भर्ती कराए गए थे, जिनमें 119 मौतें हुई थीं। ------------------
हालात बेहद चिंतनीय
इंसेफेलाइटिस मरीजों की बढ़ती संख्या एवं मौतों ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। दस साल पहले तक पूर्वाचल में मच्छर जनित जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर होता था लेकिन ठंड के मौसम में बीमारी ठंडी पड़ जाती थी। वर्ष 2003 में जलजनित बीमारी की दस्तक के साथ स्थिति बिगड़ी। इसके बाद साल के हर माह में मरीजों की संख्या बढ़ती गई। हाल के वर्षो में जलजनित इंसेफेलाइटिस का असर बढ़ा तो नवंबर-दिसंबर में भी मरीजों की भर्ती व मौतें बढ़ गईं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति बेहद खतरनाक है। जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए तो टीके मौजूद हैं लेकिन जलजनित इंसेफेलाइटिस के साथ ऐसा नहीं है। पूरी दुनिया में इस बीमारी से बचाव के लिए कोई टीका नहीं बन पाया है। इलाज का सही इंतजाम नहीं होना मौतों के बढ़ने की एक बड़ी वजह है। जिला अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सही व्यवस्था नहीं होने से मेडिकल कालेज में ज्यादातर मरीज भर्ती हो रहे हैं। वहां मरीजों की भारी तादाद के आगे डाक्टर, स्टाफ, बेड के साथ ही अन्य संसाधनों की भी कमी बनी हुई है।
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नवंबर में नौ वर्ष की तस्वीर
साल भर्ती मौतें
2005 275 111
2006 299 71
2007 457 119
2008 135 66
2009 350 74
2010 409 55
2011 385 89
2012 289 81
2013 509 108
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दूषित जल के चलते इंसेफेलाइटिस के मरीजों की तादाद इतनी बढ़ी है। नवंबर में भी भूजल का स्तर ऊपर आने से यह समस्या हुई।
डा. केपी कुशवाहा, प्राचार्य, गोरखपुर मेडिकल कालेज
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