यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 26, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मृतकों व विकलांगों को मुआवजा दिलाने की पहल

जागरण संवाददाता, गोरखपुर :
इस साल भी इंसेफेलाइटिस से मृतकों के परिजनों व विकलांग हुए लोगों को मुआवजा दिलाने की पहल की गई है। बीमारी से लगातार हो रही मौतों को देखते हुए मंडलायुक्त जेपी गुप्ता ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से अनुरोध किया है।
इसके लिए उन्होंने साल 2012 में मृतकों व विकलांगों को मुआवजा देने संबंधी आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि इंसेफेलाइटिस से मृत्यु होने पर प्रति मृतक रु. 50,000 तथा प्रति विकलांग एक लाख रुपये की दर से प्रभावित परिवारों को भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी गोरखपुर मंडल में बीमारी का प्रकोप जारी है, परन्तु अब तक मृतकों व विकलांगों को मुआवजा देने के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। प्रमुख सचिव से इस संबंध में जल्द शासनादेश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
जिले को लेकर डीएम रवि कुमार एनजी ने भी प्रमुख सचिव को अपनी तरफ से भी एक पत्र भेजा है। बता दें कि इंसेफेलाइटिस पिछले साढ़े तीन दशकों से पूर्वाचल में तबाही मचा रही है, पर मृतकों व विकलांगों को मुआवजा सिर्फ दो बार साल 2005 व 2012 में ही मिला है। साल 2005 में महामारी अपने भयावह रूप में थी। इस साल दो हजार से अधिक मौतें हुई और भारी तादाद में लोग विकलांग हुए थे। तब गोरखपुर मेडिकल कालेज के दौरे पर आए प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पहली बार मृतकों को पचास हजार तथा विकलांगों को एक लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन सिर्फ एक साल मिलने के बाद मुआवजा फिर बंद हो गया। बीते साल अक्टूबर में गोरखपुर के दौरे पर आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दूसरी बार मुआवजे के लिए आदेश दिए। इसके तहत साल 2012 में इंसेफेलाइटिस से मृतकों व विकलांगों को मुआवजा मिला पर इस बार के लिए अब तक कोई आदेश नहीं आया है। इस साल सिर्फ गोरखपुर मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस के 1980 मरीज भर्ती हो चुके हैं जिनमें से 568 की मौत हो चुकी है।
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