यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 07, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अब कितनी मौतों का इंतजार

जागरण संवाददाता, गोरखपुर :
पूर्वाचल में इंसेफेलाइटिस से लगातार हो रही मौतों के बावजूद इलाज के स्तर पर घोर लापरवाही बरती जा रही है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सौ बेड वाले जिस अत्याधुनिक इंसेफेलाइटिस वार्ड का उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री ने पिछले आठ अक्टूबर को किया था, वह महीने भर बाद भी शुरु नहीं हो पाया है। आक्सीजन पाइप लाइन का काम बाकी है। डाक्टर व स्टाफ की तैनाती के लिए भेजा गया 4.84 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी अब तक मंजूर नहीं हो पाया है। बेड, अत्याधुनिक उपकरण व वेंटीलेटर बेकार पड़े हैं। नतीजा है कि इस समय भी भारी तादाद में गंभीर मरीज डाक्टर, स्टाफ, वेंटीलेटर आदि संसाधनों की कमी से दम तोड़ रहे हैं।
यह हाल तब है जब महामारी इस साल पांच सौ से अधिक मासूमों की जान ले चुकी है। संसाधनों की कमी किस हद तक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बाल रोग के वार्डो के 228 बेड पर 400 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इनमें से आधे मरीज इंसेफेलाइटिस के हैं। नतीजा है कि एक बेड पर दो से तीन मरीज भर्ती किए गए हैं। सौ बेड के नए वार्ड में जहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जाना चाहिए वहां लगभग ठीक हो चुके तीस मरीजों को रखा गया है। डाक्टरों की बात करें तो इतने बेड व मरीजों के इलाज के लिए कम से कम सवा सौ डाक्टर होने चाहिए, पर मेडिकल कालेज में वरिष्ठ चिकित्सकों, रेजीडेंट, बाहर के मेडिकल कालेजों से आए,प्रांतीय चिकित्सा सेवा के साथ राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत तैनात किए गए डाक्टरों को मिलाकर करीब पचास डाक्टर हैं जिन पर चौबीसों घंटे इलाज की जिम्मेदारी है। लापरवाही किस हद तक बरती गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बाहर के जिलों से इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिए आए अधिकतर डाक्टर अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते में ही लौट चुके हैं। साल 2011 में मेडिकल कालेज में आए प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव अनूप मिश्र ने यहां डिप्लोमा इन चाइल्ड हेल्थ की सात सीटें मंजूर की थीं। 2012 तक तो पढ़ाई हुई पर इस साल इन सीटों पर प्रवेश नहीं मिला। नतीजा डाक्टरों की और कमी हो गई।
बीस करोड़ की लागत से बने सौ बेड वाले जिस अत्याधुनिक वार्ड के इस साल अगस्त में शुरू होने की बात कही जा रही थी वह सीएम द्वारा उद्घाटन के महीने भर बाद भी शो-पीस बना हुआ है। बेहद महत्वपूर्ण आक्सीजन पाइप लाइन की कमी से वेंटीलेटर बेकार पड़े हैं। यही नही बल्कि वार्ड में 214 डाक्टरों व अन्य स्टाफ की तैनाती के लिए दो साल से 4.84 करोड़ का प्रस्ताव कई बार भेजा जा चुका है पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि प्राचार्य डा. केपी कुशवाहा ने पिछले आठ अक्टूबर के बाद मुख्यमंत्री के सामने भी यह मांग रखी। मेडिकल कालेज के अन्य कई मांगें पूरी भी हुई, पर सौ बेड के वार्ड से संबंधित यह प्रस्ताव अब तक मंजूर नहीं हो पाया है। आए दिन भारी तादाद में मौतों के बावजूद न तो प्रदेश सरकार ने कोई कार्रवाई की न ही केंद्र सरकार ही इसमें कोई रुचि ले रही है।
इलाज छोड़ लौटे 99 मरीज
बीआरडी मेडिकल कालेज में संसाधनों की कमी से इलाज में हो रही दिक्कत के चलते अब तक भर्ती हुए 1776 मरीजों में से 99 मरीज इलाज बीच में छोड़ कर जा चुके हैं।
मौजूद संसाधनों में बेहतर से इलाज किया जा रहा है। सौ बेड के वार्ड में आक्सीजन पाइप लाइन का काम इस महीने के आखिर तक पूरा हो जाएगा। वार्ड में मानव संसाधन की तैनाती के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
डा. केपी कुशवाहा, प्राचार्य
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