यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 07, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इंसेफेलाइटिस वार्ड में जान फूंकने की कोशिश नाकाम

-न आक्सीजन की व्यवस्था और न डाक्टर व स्टाफ, वेंटीलेटर भी बेकार
- दुश्वारियों में फंसे इंसेफेलाइटिस वार्ड का आज शुभारंभ करेंगे सीएम
हेमन्त पाठक, गोरखपुर
बीस करोड़ की लागत से बने सौ बेड वाले जिस अत्याधुनिक इंसेफेलाइटिस वार्ड का उद्घाटन मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों होना है, वह अब भी आक्सीजन के बिना बेजान पड़ा हुआ है। वार्ड को डाक्टर व अन्य स्टाफ की तैनाती का भी इंतजार है। इससे साफ है कि सौ बेड, वेंटीलेटर व अत्याधुनिक उपकरण होते हुए भी यहां गंभीर मरीजों का इलाज संभव नहीं है। हद तो यह कि वार्ड निर्माण के लिए बजट मिले दो साल बीत चुके हैं।
मुख्यमंत्री के मंगलवार को मेडिकल कालेज में आने की सूचना आते ही आनन फानन वार्ड का काम पूरा करने की कोशिश शुरू कर दी गई है। सोमवार की शाम तक यहां सौ से अधिक बेड व तीस वेंटीलेटर लगा दिए गए, पर वेंटीलेटर आदि चलाने के लिए सबसे जरूरी आक्सीजन पाइप लाइन व कंप्रेस्ड एयर सप्लाई का काम अब भी बाकी है। बताते हैं कि तीन दिन पहले लिक्विड आक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि यहां मुआयना कर लौट गए। अभी पुणे से एक्सप्लोसिव की टीम से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। विशेषज्ञों के मुताबिक चाहे कितनी भी जल्दी क्यों न की जाए महीने भर से पहले आक्सीजन पाइप लाइन का काम पूरा नहीं हो पाएगा। वार्ड में इलाज करने के लिए डाक्टरों व अन्य स्टाफ की तैनाती न होना भी बड़ी समस्या है।
कार्य की गति पर गौर करें तो सौ बेड के इस वार्ड को तैयार करने में शुरू से ही सुस्ती बरती जा रही है। 24 सितम्बर 2011 को मेडिकल कालेज के दौरे पर आए प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव अनूप मिश्र ने वार्ड के निर्माण की बात कही थी। इसी दिन शाम को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इंसेफेलाइटिस वार्ड के लिए बीस करोड़ रुपए अवमुक्त करने की घोषणा कर दी।
त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य सचिव ने 29 सितम्बर को वार्ड में आवश्यताओं से संबंधित प्रस्ताव के के साथ डा. केपी कुशवाहा को लखनऊ बुलाया। इसके एक हफ्ते बाद 5 नवम्बर 2011 को 20 करोड़ की धनराशि जिला स्वास्थ्य समिति गोरखपुर के खाते में आ गई। इसमें बारह करोड़ रुपए वार्ड के निर्माण के लिए, 6 करोड़ 88 लाख उपकरणों के लिए तथा बाकी अन्य कार्यो के लिए दिए गए थे। वार्ड के निर्माण के लिए 12 करोड़ लोक निर्माण विभाग को ट्रांसफर कर दिए गए। 23 दिसम्बर 2011 को तत्कालीन मंडलायुक्त के. रविन्द्र नायक ने सौ बेडों वाले इंसेफेलाइटिस वार्ड का शिलान्यास किया लेकिन वार्ड का निर्माण 2012 के जून में शुरू हो पाया। सुस्ती के चलते अभी भी काम आधा-अधूरा ही है।
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मैन पावर के लिए प्रस्ताव पर नहीं हुई सुनवाई
वार्ड चलाने के लिए सबसे जरूरी डाक्टर व स्टाफ की तैनाती के मामले में भी शुरू से ही लापरवाही बरती जा रही है। इसके लिए इस साल की शुरुआत राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को प्रस्ताव भेजा गया। चिकित्सकों, सीनियर व जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट आदि पदों के एक वर्ष के वेतन के लिए लगभग सवा चार करोड़ रुपये मांगे गए हैं। प्रस्ताव कई भेजा गया पर अब तक सुनवाई नहीं हुई।
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