यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 01, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंची इंसेफेलाइटिस

हेमन्त पाठक, गोरखपुर
पूर्वाचल के मासूमों के लिए काल बनी इंसेफेलाइटिस इस बार अधिक भयावह बन गई है। बेहतर इलाज एवं रोकथाम के सरकार दावों के बावजूद बीमारी मासूमों को लगातार मौत की नींद सुला रही है। पिछले साल की तुलना में इस महामारी से प्रभावित तकरीबन हर जिले में मौतें बढ़ी हैं। इससे विशेषज्ञों व अफसरों की भी नींद उड़ गई है। वे इसकी वजह तलाशने की कोशिशों में जुट गए हैं।
इंसेफेलाइटिस की भयावह स्थिति का यह सच तब सामने आया जब लगातार मौतें होते देख बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर द्वारा इसका अध्ययन कराया गया। पिछले साल एक जनवरी से पचीस जुलाई तक मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों और मौतों की तुलना जब वर्ष 2013 में इसी अवधि तक मरीजों की भर्ती एवं मौतों की संख्या से की गई तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। हालांकि पिछले साल भर्ती मरीजों की संख्या अधिक थी और मौतों का प्रतिशत कम था। इस साल भर्ती मरीजों की संख्या तो कम है पर मौतें अधिक हो रही हैं। मसलन 2012 में एक जनवरी से पचीस जुलाई तक मेडिकल कालेज में 535 मरीज भर्ती किए गए थे जिनमें से 94 की मौत हुई थी, जबकि इस साल पचीस जुलाई तक 237 मरीज भर्ती हुए जिनमें से 59 को नहीं बचाया जा सका। इस तरह पूरे मंडल में पिछले साल 17.57 फीसद मौतें हुई जबकि इस साल यह प्रतिशत बढ़कर 24.89 पहुंच गया है।
यह सच्चाई जब अफसरों के सामने आई तो इसके कारणों की तलाश शुरू कर दी गई। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि मौतें बढ़ने के पीछे इलाज में लापरवाही प्रमुख कारण है या फिर कोई और वजह है। जापानी इंसेफेलाइटिस के टीकाकरण का सत्यापन कराया जा रहा है। उधर बीमारी के खतरनाक रुख को देखते हुए मरीजों को जल्द से जल्द बेहतर इलाज देने की पहल शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को हिदायत दी गई है कि वे प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी मरीजों की भर्ती सुनिश्चित कराएं, जिससे मेडिकल कालेज पर भर्ती होने वाले मरीजों का दबाव कम हो सके। कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस भी उपलब्ध है। ऐसे में मरीज की हालत गंभीर होने पर एंबुलेंस से ही मेडिकल कालेज रेफर किया जाए।
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25 जुलाई तक मौतें फीसद में
जिला 2012 2013
ंगोरखपुर 25.50 34.55 देवरिया 17.59 22.86 कुशीनगर 12.92 23.94ं महराजगंज 14.49 17.07
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अगस्त की तस्वीर
साल भर्ती मौतें
2012 427 65
2013 413 115
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कहते हैं विशेषज्ञ
बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य व बाल रोग के विभागाध्यक्ष डा. केपी कुशवाहा का कहना है कि इस बार बीमारी ज्यादा भयावह रूप में हैं। जो भी मरीज इलाज के लिए मेडिकल कालेज पहुंच रहे हैं उनमें से ज्यादातर अति गंभीर अवस्था में रह रहे हैं। इसी से मौतें अधिक हो रही हैं। मौतें अधिक होना होना चिंताजनक हैं और इसके लिए कारणों की पड़ताल की जा रही है।
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