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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जेई के बढ़ते मामलों से अफसरों की बेचैनी बढ़ी

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Published: Mon, 26 Aug 2013 11:36 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 26 Aug 2013 11:37 PM (GMT+05:30)

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हेमन्त पाठक,गोरखपुर

टीकाकरण के साथ ही फागिंग व बचाव के अन्य दावों के बीच जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) के बढ़ते मामलों ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। पिछले साल इस समय तक जहां उन्नीस मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई थी वहीं इस समय यह तादाद 41 तक पहुंच गई है। जेई के बढ़ रहे मरीजों ने पूर्वाचल में इसकी रोकथाम के लिए हुए टीकाकरण को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उधर कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सभी मामलों का विश्लेषण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पता लगाने को कहा गया है कि उनका जेई टीकाकरण हुआ भी है या नहीं।

विभागीय मंत्री से लेकर आला अधिकारी बार-बार यह दावा कर रहे थे कि मच्छरजनित जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर काफी कम हो गया है, सिर्फ जलजनित बीमारी से निपटना बाकी है। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में बढ़े जापानी इंसेफेलाइटिस के मामलों ने इन दावों के साथ ही बचाव के इंतजामों को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। बीमारी के इस रुख ने अफसरों की चिंता बढ़ा दी है। इसकी वजह की तह तक जाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। खुद कमिश्नर जेपी गुप्ता ने मंडल के चारों जिलों के सीएमओ से कहा है कि टीकाकरण के बावजूद जापानी इंसेफेलाइटिस के मरीज मिलना अत्यंत चिंता का विषय है। ऐसी हालत में यह जरूरी है कि ऐसे मरीजों का विस्तृत विश्लेषण कराया जाय। यह पता लगाया जाय कि उनका जेई टीकाकरण हुआ है या नहीं। सीएमओ को जनपद स्तरीय टीम गठित कर मरीजों के सत्यापन के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में फागिंग, छिड़काव, सफाई, पेयजल स्रोतों का विसंक्रमण, रक्त पट्टिका बनाने की कार्रवाई की जाय।

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टीकाकरण पर सवाल

जेई के बढ़ते मामलों ने टीकाकरण को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। बता दें कि साल 2010 में पूर्वाचल में जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए एक से पंद्रह साल के बच्चों का टीकाकरण कराया गया था। अभियान नवम्बर से शुरू हुआ था और जनवरी 2011 तक शत-प्रतिशत टीकाकरण की बात कही गई। टीकाकरण से वंचित बच्चों की सूची तैयार की इस साल भी टीकाकरण कराया गया था। फागिंग, छिड़काव के दावे भी किए गए पर नतीजा सामने है।

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पकड़ी जा चुकी है लापरवाही

बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित गोरखपुर मंडल के दो जिलों कुशीनगर व महराजगंज में टीकाकरण में गंभीर लापरवाही पहले ही सामने आ चुकी है। खुद कमिश्नर ने जेपी गुप्ता इन जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांग चुके हैं। कुशीनगर की बात करें तो जून महीने तक वार्षिक लक्ष्य का सिर्फ 12.58 फीसद तथा महराजगंज में 12.04 फीसद हासिल किया गया। इसका नतीजा भी सामने है। जिन लोगों में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है उनमें कुशीनगर के छह तथा महराजगंज के पांच मरीज हैं।

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