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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 08, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब तक जेई के 45 मरीज मिले

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Published: Wed, 08 Oct 2014 10:11 PM (GMT+05:30)

गोंडा: तमाम दावों के बाद भी इंसेफ्लाइटिस का कहर थम नहीं रहा है। देवीपाटन मंडल में 45 लोग इंसेफ्लाइटि

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गोंडा: तमाम दावों के बाद भी इंसेफ्लाइटिस का कहर थम नहीं रहा है। देवीपाटन मंडल में 45 लोग इंसेफ्लाइटिस की गिरफ्त में आ चुके हैं, जबकि सात दुनिया से चल बसे हैं। इंसेफ्लाइटिस से बचाव के लिए पूर्व में दिए गए निर्देश के बाबत अब तक की गई कार्रवाई के बारे में अब खोजबीन शुरू हो चुकी है। अपर निदेशक ने देवीपाटन मंडल के चारों जिलों के सीएमओ से इस बारे में रिपोर्ट मांगी गई है।

जापानी इंसेफ्लाइटिस को लेकर पिछले माह हुई समीक्षा में देवीपाटन मंडल के आयुक्त रवि प्रकाश अरोड़ा ने लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने अब तक की गई कार्रवाई के बारे में खोजबीन शुरू कर दी है। मंडल के चारों जिलों के सीएमओ को इंसेफ्लाइटिस को लेकर स्वयं सतर्क रहने की हिदायत दी गई थी। बावजूद इसके इंसेफ्लाइटिस का दायरा बढ़ता जा रहा है। जेई का टीका लगने के बावजूद इस पर रोक नहीं लग पा रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बात की पड़ताल में लग गए है कि आखिर इंसेफ्लाइटिस पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है। कहां पर खामियां हैं, क्या वजह है। इसको लेकर अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी टेंशन में आ गए हैं। कारण भी तलाशे जाने लगे हैं।

स्थिति एक नजर में

जापानी इंसेफ्लाइटिस

- बहराइच में 10 ग्रसित

- श्रावस्ती में 6 ग्रसित व दो मृतक

एक्यूड इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम

- गोंडा में ग्रसित दो व मृतक एक

- बलरामपुर में ग्रसित दो व मृतक एक

- बहराइच में ग्रसित 12 व मृतक दो

- श्रावस्ती में ग्रसित 8

क्या दिए गए थे निर्देश

- मंडल के सभी जिलों में फीवर ट्रैकिंग का कार्य आशाओं व स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किया जाय।

- सभी जनपदों में पर्याप्त मात्रा में फागिंग मशीनें, मैलाथियान टेक्निकल से फागिंग कराई जाए।

- जनपदों में विज्ञापन, हैंड बिल, वाल राइटिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाए।

- स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से रोग की रोकथाम के लिए प्रचार, प्रसार, स्वास्थ्य शिक्षा का कार्य किया जाय।

- जिलों में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को जेई का टीका लगाया जाय।

- नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की मानीटरिंग सीएमओ द्वारा की जाय।

- सभी जनपदों में पेयजल स्रोतों को विसंक्रमण किया जाय।

- सभी जिलों के जिला अस्पतालों में एक अलग वार्ड बनाया जाय।

'' देवीपाटन मंडल के चारों जिलों के सीएमओ से जेई व एईएस को लेकर अब तक की गई कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में उपचार व निरोधात्मक गतिविधियों के साथ ही अन्य किये गये प्रबंधों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी देने को कहा गया है। ''

- डॉ. एसएन ओझा, अपर निदेशक स्वास्थ्य, देवीपाटन मंडल