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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 09, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

टीबी व कुपोषण से सगे तीन भाइयों की मौत

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Published: Wed, 09 Jul 2014 07:59 PM (IST)

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जमानियां (गाजीपुर) : क्षेत्र के दरौली गांव के ईट भट्ठा मजदूर परिवार के टीबी से ग्रसित तीन सगे भाइयों की पिछले एक सप्ताह के अंदर मौत हो गई। इससे परिवार सदमे में आ गया है। यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई। सूचना मिलते ही सीएमओ डा. बीएन गुप्ता चिकित्सकों की टीम सहित मौके पर पहुंच गए। जांच में पता चला कि पूरा परिवार इस रोग की चपेट में है और कुपोषण का शिकार भी। उन्हें तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर लाकर भर्ती कराया गया।

ईट भट्ठा मजदूर शिवबदन पासवान एवं उसकी पत्‍‌नी अपने तीन जवान पुत्रों बहादुर (21), गोविंद (19) एवं प्रदुम्मन (16) को गंवाने के बाद सदमे में हैं। इस परिवार पर एक वर्ष पहले उस समय टीबी का साया पड़ा जब बहादुर पंजाब किसी निजी फैक्ट्री मे कमाने गया था। बीमार होने की वजह से उसका काम छूट गया और वह घर आ गया। परिवार वालों ने बिहार स्थित किसी टीबी अस्पताल में इलाज कराया। पैसे समाप्त होने के बाद इलाज बंद कर दिया। इस दौरान साथ रहने से उनका पूरा इसकी चपेट में आ गया। इसी दौरान किसी ने उन्हें इसे भूत-प्रेत का साया बता दिया। उसके बाद वह परिवार दवा छोड़ ओझा-सोखा के चक्कर में फंस गया। इससे बीमारी बढ़ती गई और दो जुलाई को प्रदुम्मन की मौत हो गई। इससे परिवार अभी उबरा भी नहीं था कि छह जुलाई को बहादुर की मौत हो गई। इससे परिवार में कोहराम मच गया लेकिन अभी भी इस परिवार पर कुदरत का कहर बरपना बाकी था। आठ जुलाई को तीसरे भाई गोविंद ने भी दम तोड़ दिया।

मामले से अनजान स्वास्थ्य विभाग

- मजे की बात तो यह है कि इस परिवार के सदस्य बीमारी एवं कुपोषण का शिकार होकर एक-एक मरते रहे और स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन का इसकी भनक तक नही लगी। ग्रामीणों से जब पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह को इसका पता चला तो उन्होंने अपने प्रतिनिधि मन्नू सिंह को मौके पर भेजा। उनकी सूचना पर मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। मन्नू सिंह ने पीड़ित परिवार सहित इस बीमारी की चपेट में आए अन्य कई परिवारों को खाने के लिए एक महीने का राशन उपलब्ध कराया। कहा कि अगर जांच में कोई गंभीर बीमारी सामने आती है तो उसे तत्काल मंत्री द्वारा इलाज के लिए एक लाख रुपए का सहयोग दिया जाएगा।

गांव में दौड़ी मेडिकल टीम

- सालों से इससे अनजान स्वास्थ्य विभाग मामला बिगड़ जाने के बाद मौके की और दौड़ पड़ा। सीएमओ डा. बीएन गुप्ता खुद मौके पर गए। उनके साथ जिला क्षय रोग अधिकारी डा. सीएम पांडेय भी मेडिकल टीम के साथ पहुंचे। इस बीमारी की चपेट में बस्ती के और कई परिवार भी आ चुके हैं। सभी लोगों को एंबुलेंस से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर लाया गया और उन्हें तत्काल जीवन रक्षक दवाएं दी गई।

पूरा परिवार है चपेट में

- इस बीमारी की चपेट में शिवबदन एवं उसकी पत्नी शकुंतला सहित पूरा परिवार आ गया है। शिवबदन के छह पुत्र एवं एक पुत्री है। तीनों बड़े पुत्रों की मौत होने के बाद पुत्री लक्ष्मीना (17), पुत्र प्रदीप (10), कुलदीप (8) एवं संदीप (5) को भी टीबी ने जकड़ लिया है। यही नहीं वहां आस-पास के लोग भी इससे ग्रसित हो गए हैं। मजदूरी कर पेट पालने वाले परिवारों के पास न तो इलाज कराने के लिए धन है और न ही जागरुकता। हालांकि वहां से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है।

बोले सीएमओ

- इस परिवार ने यहां सरकारी अस्पताल में इलाज कराया ही नहीं। वे बिहार के किसी टीबी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। इसकी दवा सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क मिलती है। अब परिवार के बचे हुए सदस्यों का समुचित इलाज कराया जाएगा।