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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विचित्र बुखार से भाई-बहन की मौत, दहशत

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Published: Fri, 29 Aug 2014 07:37 PM (IST)

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गाजीपुर, संवाद सूत्र (फतेहपुर) : स्वास्थ्य महकमा की संवेदनहीनता के चलते गाजीपुर थाने के डुंडरा गांव में एक चचेरे भाई-बहन की विचित्र बीमारी से मौत हो गई। सूचना मिलते ही सीएमओ ने मलेरिया विभाग की टीम को मौके पर भेजा। एक साथ दो मौते होने से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में डेंगू से मौत होने की चर्चा से दहशत है।

डुंडरा गांव निवासिनी कु. मोनी (17) पुत्री रामकृपाल मौर्य व उसके चचेरे भाई विनय कुमार (10) पुत्र राजकुमार मौर्य को 21 अगस्त को शाम वायरल फीवर हुआ था। परिजनों ने उक्त चचेरे भाई-बहन को राधानगर स्थित प्राइवेट नर्सिग होम में भर्ती कराया। वहां से परिजन उन्हें 25 अगस्त को जिला चिकित्सालय लेकर गए । डेंगू की आशंका पर डाक्टरों ने उन दोनों को कानपुर हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। क्योंकि यहां पर डेंगू की किट है ही नहीं थी।

परिजन दोनों बच्चों को हैलट हास्पिटल कानपुर में ले जाकर भर्ती कराया जहां गुरुवार को पहले मोनी ने दम तोड़ा, बाद में उसके चचेरे भाई विनय ने देर रात दम तोड़ दिया। चचेरे भाई-बहन के शव शुक्रवार को गांव आए तो परिजनों में कोहराम मच गया। मोनी की मां कमला देवी व विनय की मां किरन अपने अपने बच्चों के शवों से चीत्कार करती रहीं जिन्हें नाते रिश्तेदार ढांढस बंधाते रहे। मृतक के परिजनों की मानें तो डेंगू से बच्चों की मौत हुई है। विचित्र बीमारी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। मृतकों के मामा ग्राम प्रधान सरकी सत्येंद्र प्रसाद मौर्य की सूचना पर मलेरिया संक्रामक सेल प्रभारी जागेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम गांव पहुंचकर हैलट हास्पिटल के डाक्टरों की रिपोर्ट देखी।

सीएमओ डा. मुरारीलाल वर्मा ने बताया कि डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है। हैलट की रिपोर्ट में टायफाइड व प्लेटलेट्स 50 हजार था इसलिए टायफाइड व वायरल फीवर से ही बच्चों की मौत हुई है लेकिन डेंगू से नहीं।