यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बुखार की दवा बांट कर चलते बने चिकित्साधीक्षक

हुसेनगंज, संवाद सूत्र : 73 दिन में 15 मौतों का मामला उजागर होते ही स्वास्थ्य महकमें में हड़कंप मच गया। विभाग में मची अफरा तफरी का आलम यह रहा कि बिना टीम के ही अधीक्षक गांव जा पहुंचे। ग्रामीणों से मौत के कारण का फौरी तौर पर पता लगाने की कोशिश की। वहीं विभाग के हाकिम का कहना है कि आज टीम जाएगी। जांच पड़ताल करके मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा।
भिटौरा ब्लाक के गांव मालीपुर मजरे पहनी छीटू में 1 दिसंबर से लेकर 13 फरवरी तक 15 मौतें हो चुकी हैं। मौत के आगोश में आए लोगों में बीमारी के लक्षण तो उजागर हैं लेकिन बीमारी के कारणों का पता अभी तक नहीं लग पाया है। गांव वालों की जुबानी है कि चिकित्सकों ने हार्ट की समस्या बताई है। कम उम्र से लेकर वृद्ध तक की मौत सीने में दर्द और उल्टी आने से हुई। खबर के छपते ही विभाग में हलचल पैदा हो गई। सुबह पहर हुसेनगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक डॉ. सतीश चंद्रा शुक्रवार को दो बजे गांव पहुंचे। गांव जाकर ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। मामला तब बिगड़ते बिगड़ते बचा जब वह बुखार के लिए पैरासिटामॉल और एंटी रॉक्सीथ्रोमायसिन बायोटिक बांटना शुरू कर दिया। लोगों ने विरोध दर्ज करते हुए दवा लेने से मना कर दिया। भय और दहशत के बीच जी रहे ग्रामीणों ने कहाकि यही दवाएं लेनी होंगी तो बाहर से लें लेंगे। जांच कर नहीं रहे हैं, बुखार की दवा बांटने लगे। डॉ. चंद्रा ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जांच के लिए आने की बात कह कर निकल लिए। ग्रामीण राम विशाल, सर्वेश, कल्लू, मनोज, वीरेंद्र का कहना रहा कि स्वास्थ्य विभाग अभी भी नहीं चेत रहा है। अधिकारियों के निर्देश पर आए डॉक्टर विभाग को गुमराह करके रख देंगे। गांव में कौन सी बीमारी है इसमें मिट्टी डालने का पूरा प्रयास करेंगे। विभाग की नजर अंदाजी से पहले ही लोगों में गुस्सा भरा हुआ है।
जांच टीम करेगी खुलासा : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एमपी वर्मा ने कहाकि राजपत्रित अवकाश के चलते शुक्रवार को जांच टीम नहीं जा पाई है। शनिवार को जांच टीम जाएगी। गांव में फैली रहस्यमयी बीमारी की पड़ताल करेगी।
मिट्टी डालने के प्रयास जारी
मामला उजागर होने से पूर्व ही उसमें मिट्टी डालने के प्रयास किए जाने लगे। सुबह होते होते पृष्ठभूमि तैयार हो गई। शाम पहर जब सीएमओ से मामला जाना गया तो उन्होंने पीएचसी, सीएचसी को मोबाइल घनघनाया। यहां पर तैनात डॉक्टरों ने एएनएम, आशा बहु, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के पेंच कसे गए। सुबह पहर हर किसी जिम्मेदार की जुबां से निकलने लगा कि अलग अलग बीमारियों से मौत हुई है। लक्षण और उम्र को जुटाकर बचाव किया जाता रहा।
