विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 27, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चिकनपाक्स से एक की मौत, 18 बीमार

By Edited By:
Published: Fri, 27 Dec 2013 06:09 PM (IST)

News Article Hero Image

चित्रकूट, कार्यालय संवाददाता : शहर से सटे कालूपुर पाही गांव मे चिकनपाक्स का प्रकोप है। एक सप्ताह से फैली इस बीमारी से अब तक एक की मौत हो चुकी है। जबकि एक परिवार के दस सदस्य सहित लगभग डेढ़ दर्जन लोग बीमारी की चपेट में हैं।

मुख्यालय से सटे कालूपुर पाही गांव के भजराम राजपूत (35) पुत्र केशव की चिकनपाक्स के चलते शुक्रवार को मौत हो गई। भजराम पत्‍‌नी गायत्री व तीन पुत्रों को रोता-बिलखता छोड़ गया है। जिसकी मौत से पूरा परिवार सदमे में हैं। बताया गया है कि भजराम खेती किसानी कर परिवार का पालन करता था। भजराम का पुत्र संदीप (10) व कुलदीप (8) भी चिकनपाक्स की चपेट में हैं। इसके अतिरिक्त उसके परिवार के रामप्रकाश (20) पुत्र बांके बिहारी, राकेश (25) पुत्र शिवपूजन, प्रकाश (8) पुत्र उदयभान, रोशन (9) व उसकी बहन संगीता (5) पुत्री रमेश, सरोज देवी (23) पत्‍‌नी राकेश, रामबाबू (25) पुत्र जगन्नाथ, नीरज (5) पुत्र उदयभान चिकनपाक्स की गिरफ्त में हैं।

इसके अलावा गांव की रूपा (8) पुत्री रमेश, प्रभात (15) पुत्र राजकिशोर, अमित वर्मा(14) पुत्र लल्लू में भी चिकनपाक्स के लक्षण पाए गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को बीमारी फैलने की जानकारी दी गई है लेकिन गांव में कोई भी स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचा।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वेदप्रकाश ने बताया कि डाक्टरों की टीम ने लगभग एक सप्ताह पहले ग्रामीणों से संपर्क किया था। भ्रांतियों के कारण ग्रामीणों ने दवा लेने से इंकार कर दिया। मौत की जानकारी होने पर फिर टीम भेजी गई है।

अंधविश्वास में गई जान

चिकनपाक्स को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रांतियां व्याप्त हैं। लोगों का मानना है कि यह कोई बीमारी नहीं बल्कि देवी का प्रकोप है। रोग से निजात के लिए दवा के स्थान पर पूजा-पाठ का सहारा लिया जाता है। यही काम कालूपुर पाही में भजराम की बीमारी के दौरान किया गया। जिसके चलते उसकी मौत हो गई।

बीमारी में क्या करें

मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वेदप्रकाश ने बताया कि चिकनपाक्स छूआछूत से फैलने वाली बीमारी है। सामान्यत: इसका असर सात दिनों तक रहता है। उन्होंने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों को बीमारी से ग्रसित होने पर विद्यालय न भेजें। एक-दूसरे के बिस्तर व पहनने वाले कपड़ों का प्रयोग न किया जाए। बीमारी के दौरान एंटीबायटिक दवाओं का चिकित्सक की सलाह पर प्रयोग करें।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर