यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
टीबी : परिवार के तीन की ले चुकी है जान

सकलडीहा (चंदौली) : क्षय रोग (टीबी) अब असाध्य रोग नहीं रहा। परंतु अज्ञानता व जागरुकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी इस रोग से ग्रसित मरीजों की मौत हो रही है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में डास्प योजना के तहत मुफ्त इलाज का प्रावधान है। फिर भी इस रोग से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा।
विकासखंड सकलडीहा का एक गांव है इंटवा। जहां एक ही परिवार के तीन सदस्य टीबी से कालकवलित हो चुके हैं। अब भी पिता-पुत्र किसी अनहोनी की आहट से सहमे हुए हैं। इंटवा गांव निवासी सुराहू (70) किसी समय रिक्शा व ट्राली चलाकर अपने भरे-पूरे घर को चलाते थे। परंतु आज वह टीबी से ग्रसित हो किसी काम के नहीं रहे। उनका पुत्र रामअवतार (50) एक कुशल ड्राइवर है। सवारी वाहन चलाकर परिवार चलाने में पिता की मदद करता था। मौजूदा समय में वह भी टीबी से ग्रसित है और पूरे दिन चारपाई पर पड़ा रहता है। यहीं नहीं सुराहू के पुत्र राजू (19), पुत्रवधू तेतरी (30) व रामअवतार के पुत्र पिंटू (16) की मौत टीबी के चलते पूर्व में ही हो चुकी है। खतरा अब इनके बाद के पीढ़ी के सर पर भी मंडरा रहा है। हालांकि सुराहू व रामअवतार ने निजी से लगायत सरकारी अस्पतालों में लंबे अरसे तक इलाज कराया है। यहीं नहीं रामअवतार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड धारक भी हैं। परंतु जागरुकता के अभाव में अब अपनी किस्मत का रोना रोने को विवश हैं। दो-दो कमाऊ व्यक्ति के बीमार रहने से परिवार की माली हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बड़े चिकित्सक डा. वीके प्रसाद कहते हैं कि इस तरह के मरीजों को डास्प योजना के तहत निशुल्क जांच व दवा देने का प्रावधान है। मरीजों को इसका लाभ अवश्य लेना चाहिए।
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