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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब तक 70 मौत, कब थमेगा 'काल' कहर

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Published: Sun, 20 Sep 2015 12:32 AM (IST)

बुलंदशहर: बुखार के कहर ने 70 ¨जदगी लील ली हैं। हर दिन मौतों का आंकड़ा सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा र

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बुलंदशहर: बुखार के कहर ने 70 ¨जदगी लील ली हैं। हर दिन मौतों का आंकड़ा सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है।

जिले में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत चार बड़े अस्पताल हैं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या 13, जबकि पीएचसी 6 और न्यू पीएचसी की संख्या 55 है। निजी क्लीनिकों का आंकड़ा भी लगभग साढ़े सात सौ हैं। इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की स्थिति देखें तो औसतन तीस से चालीस हजार रोगी प्रतिदिन इलाज कराने पहुंच रहे हैं। अफसरों के दावे हैं कि जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाएं चकाचक हैं, जबकि कुत्तों का घूमना और मरीजों के इलाज में लापरवाही इन केंद्रों में आम बात है। शनिवार को जिला अस्पताल में एक-एक बेड पर चार-चार रोगी लेटे हुए थे। पिछले चार दिनों में करीब 40 लोगों ने बुखार से दम तोड़ा है। अकेले अनूपशहर में शनिवार को छह लोगों ने दम तोड़ा। औसतन हर दिन 10 लोग बुखार से मर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि जनपद में डेंगू नहीं है। विभाग की कलाबाजी देखिये हाल में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बुलंदशहर नगर में 35 हजार घर का सर्वे किया गया। यहां कोई डेंगू का केस नहीं है। डेंगू का लार्वा भी कहीं नहीं है। यह सर्वे 1 से 15 सितंबर के दौरान कराए गए। सवाल है कि जब पूरा महकमा बुखार को लेकर सक्रिय है तो 35 हजार घरों का सर्वे कैसे हो गया? दूसरा, लोग अनूपशहर, छतारी, औरंगाबाद, जहांगीराबाद, ककोड़ क्षेत्र में सर्वाधिक मर रहे हैं, सर्वे हो रहा है कि बुलंदशहर नगर का। सर्वे ही करना है तो यह श्रमशक्ति का इस्तेमाल स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित इलाकों में करनी चाहिए। अब तक जनपद में हई 70 से अधिक मौत में पांच ऐसे मामले आए हैं जिसमें जनपद के किसी लैब ने डेंगू की पुष्टि नहीं की लेकिन वही मरीज जब नोएडा या दिल्ली के नामी हॉस्पिटल पहुंचे तो उसे रिपोर्ट में डेंगू बताया गया। सूत्रों की मानें तो पैथॉलोजी लैब पर डेंगू की रिपोर्ट न देने का दबाव है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन बुखार से रोजाना हो रही 10-12 मौत पर शुतुमुर्गी रवैया अपना रहा है। शहर से लेकर गांव के सरकारी हॉस्पिटलों का हाल बुरा है। जिला अस्पताल में बुखार वार्ड में एक बेड पर 4-5 रोगी लेटे हैं। अस्तपाल के बरामदे से लेकर पेड़ की छांव में मरीज लेटे मिलते हैं, जहां उसे पूछने वाला कोई नहीं होता है। देहात और कस्बाई क्षेत्र के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का हाल तो और भी भयावह है। बड़ा सवाल यह ऐसे लाचार हालात में मौत का बेकाबू ग्राफ नियंत्रण में आएगा? मौत का आंकड़ा आखिर कहां तक पहुंचेगा। साथ ही मौत का जिम्मेदार कौन है, यह भी तय हो।

प्राइवेट में डेंगू, सरकारी में नहीं

प्राइवेट अस्पताल अभी तक दो दर्जन से अधिक लोगों को डेंगू होने की पुष्टि कर चुके हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में एक भी डेंगू का केस नहीं दर्ज है। विभागीय अफसरों ने जो रिपोर्ट शासन को भेजी है, उसमें भी डेंगू का कोई आंकड़ा नहीं भेजा गया है।

40 यूनिट ब्लड से कैसे होगी पूíत

डेंगू होने पर आमतौर पर मरीज को ब्लड चढ़ाने की जरूरत है। लेकिन जिला अस्पताल का ब्लड बैंक ब्लड के लिए मोहताज है। 160 यूनिट की क्षमता वाले ब्लड बैंक में केवल 40 यूनिट ही ब्लड बचा हुआ है। एबी नेगेटिव और बी पॉजिटिव काफी कम है। जिला अस्पताल में ही प्रतिदिन तीन सौ तक मरीज भर्ती हैं। अगर स्थिति देखें तो जिला अस्पताल का ब्लड बैंक जिले की तो क्या जिला अस्पताल के मरीजों की पूíत भी नहीं कर पाएगा।

कागजों में हो रही फॉ¨गग?

जिले में नौ नगरपालिका और आठ नगर पंचायत हैं। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी दावे कर रहे हैं कि प्रत्येक वार्ड में फॉ¨गग कराई गई है। वहीं लोगों ने नगरपालिका में शिकायत की है कि उनके वार्ड में फॉ¨गग नहीं हो पाई है।

मलेरिया विभाग के आगे पड़ा कचरा

पुलिस लाइन स्थित मलेरिया दफ्तर के आगे कचरा पड़ा हुआ है। लोगों का आरोप है कि एकतरफ तो मलेरिया विभाग लोगों को सिखाता है कि मलेरिया से बचाव के लिए साफ सफाई रखें, लेकिन उसी दफ्तर के आगे कचरा पड़ा हुआ है। मलेरिया विभाग के अफसरों को लोगों को घर देखने से पहले खुद का विभाग की तरफ झांकना चाहिए। वहीं शहर में जगह-जगह पड़े कचरे की वजह से भी गंभीर बीमारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। आयुर्वेदाचार्य डॉ हितेश कौशिक ने बताया कि एलोपैथी दवाओं से अधिक सुरक्षित इलाज आयुर्वेद में है। अगर किसी को डेंगू है तो घरेलू आयुर्वेद के नुस्खे इलाज करा सकते हैं। बीमार व्यक्ति पेय पदार्थों का सेवन अधिक करें, गिलोय, तुलसी के पत्ते, का काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार लें, पपीते के पत्ते का तीन चम्मच रस निकालकर दें, रात को देर तक बिल्कुल भी न जागे। आमतौर पर लोगों में इन दिनों तेज बुखार, सिर में दर्द, उल्टी आदि की शिकायत है। इससे बचाव करें।

इन्होंने कहा.

मैंने खुद कई जगह निरीक्षण किया है। स्थिति नियंत्रण में है। अगर किसी भी व्यक्ति को परेशानी है तो वह मुझे व्यक्तिगत तौर पर फोन कर भी अवगत करा सकता है।

-डॉ दीपक ओहरी, सीएमओ