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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बिना दवा के कैसे रुके क्षेत्र में बुखार का प्रकोप?

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Published: Fri, 18 Sep 2015 10:12 PM (IST)

अरनिया, (बुलंदशहर) : जनपद में बुखार का प्रकोप इन दिनों चरम पर है। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ला

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अरनिया, (बुलंदशहर) : जनपद में बुखार का प्रकोप इन दिनों चरम पर है। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफतौर पर देखने को मिल रही है। क्षेत्र के गांव मुनि में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुखार व मलेरिया की दवाओं का टोटा है। इसके चलते मरीजों को दवा के नाम पर महज खानापूíत की जा रही है। इसके अलावा अस्पताल में तेल बचाने के चक्कर में बिजली जाने के बाद जनरेटर नहीं चलाया जाता, जिससे मरीज गर्मी में बेहाल हैं। साथ ही अस्पताल परिसर में पिछले काफी समय से अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मशीन आकर रख तो गई है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने के कारण ये मशीनें सफेद हाथी बनी हुई हैं और धूल चाट रही हैं। जब इस संबंध में स्थानीय लोगों और मरीजों से दैनिक जागरण ने वार्ता की, तो उन्होंने पीएचसी के प्रति अपना दर्द कुछ इस प्रकार बयां किया।

मुख्य दवा नहीं, बुखार पर कैसे लगे अंकुश

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुखार की मुख्य दवा का टोटा है। दो दिन पहले स्वास्थ्य केंद्र पर कुछ दवाएं आई थीं, जिनको गांव सारसौल, रनियावली और मुनि में लगे स्वास्थ्य कैंपों में वितरित कर दिया गया। अस्पताल में दवाइयों के अभाव में चिकित्सक अब खानापूíत करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में बुखार पर अंकुश लगे, तो आखिर कैसे लगे?

-उमाशंकर प्रधान, गांव मुनि।

एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन चाट रही धूल

मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में काफी पहले एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग गई थी। विभाग की ओर से मशीनें तो आ गई, लेकिन उसके बाद भी चालू नहीं हो पाया है। इस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर अधिक खर्चा करना पड़ रहा है।

-चंद्रपाल सारस्वत, पूर्व फौजी।

तेल बचाने के चक्कर में नही चलता जनरेटर : गर्मी के समय में मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीएचसी में जनरेटर लगाया है। लेकिन बिजली जाने के बाद भी जनरेटर नहीं चलाया जाता है। इसका सिर्फ यही उद्देश्य है कि तेल बचाकर कमाई की जाए। चाहे इस कमाई की चाह में मरीजों को गर्मी में घुट-घुटकर क्यों ना रहना पड़े?

-संजय शर्मा, मरीज।

बहुत कम लगाए जाते हैं स्वास्थ्य कैंप : स्वास्थ्य विभाग की यह जिम्मेदारी है कि समय-समय कैंप लगाकर गांवों में मरीजों का उपचार किया जाए। लेकिन विभाग द्वारा किसी बीमारी के होने के बाद ही गांवों में कैंप लगाए जाते हैं। बीमारी के फैलने के बाद उस पर रोक लगाने के लिए विभाग पर कभी दवाइयां नहीं होती, तो कभी चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

-दिनेश शर्मा, निवासी गांव मुनि।