विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 17, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

करौरा पर मंडरा रहा बुखार का 'काल, फिर तीन की मौत

By Edited By:
Published: Thu, 17 Sep 2015 09:59 PM (IST)

पहासू, (बुलंदशहर) : क्षेत्र के गांव करौरा में बुखार से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा

News Article Hero Image

पहासू, (बुलंदशहर) :

क्षेत्र के गांव करौरा में बुखार से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुखार गांव में ग्रामीणों पर काल बनकर मंडरा रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों में दहशत का आलम है। गांव निवासी 45 वर्षीय अलीशेर पिछले कई दिनों से बुखार की चपेट में था। जिसका उपचार गांव के चिकित्सक, पहासू कस्बा के निजी चिकित्सक और गांव में कैंप लगने के बाद वहां पर कराया गया। सुधार नहीं होने पर उसे बुलंदशहर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां अलीशेर की बुधवार रात को मौत हो गई।। गांव निवासी शकीन की दो वर्षीय पुत्री तुमइया की अलीगढ़ के मेडिकल कालेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। गांव निवासी ननू खां ने बताया कि उसकी 40 वर्षीय पत्नी रजिया को पांच दिन पहले बुखार आया था। उसका इलाज वह गांव में लगे सरकारी शिविरों में करा रहे थे। रजिया ने गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। जिले भर के चिकित्सकों की मेहनत के बाद भी गांव में मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। गांव में फिर हुई तीन मौतों ने स्वास्थ्य महकमे में खलबली मचा दी है।

अब तक इनकी हो चुकी है मौत : गांव में बुखार की चपेट में आकर अब तक फूलवती पत्नी राम¨सह, सोनपाल मास्टर, रामकिशोर, लेखराज, अंगूरी, हरि¨सह, लेखराज पुत्र बाबूलाल, महारानी, छतरपाल, महेंद्र, दुर्गेश, सरबला, मूíत देवी, विमला, रामनाथ, रोशन ¨सह, अर्जुन, अंकित, शीलू, इस्तयाक खां, भजनलाल, तुमईया, रजिया और अलीशेर की मौत हो गई।

......

गांव में चलाया सफाई अभियान

पहासू क्षेत्र के गांव करौरा में नगर पालिका चेयरमैन हाजी रफीक फड्डा सफाई कर्मचारियों की टीम के साथ गांव पहुंचे। जहां उन्होंने गांव में बुखार से ग्रस्त मरीजों का हालचाल जाना। उसके बाद चेयरमैन के नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों ने गांव में सफाई अभियान की शुरुआत की। करीब तीन घंटे तक पूरे गांव में सफाई करने के बाद टीम वापस खुर्जा लौटी।

.....

कहां हो उपचार, कैसे बचे जान?

ग्रामीण रमेश, तपेश, दिनेश, राजकुमार, संजय आदि ने बताया कि वह आखिरकार उपचार कराएं तो कहां कराएं। जिससे उनके गांव में बुखार से ग्रस्त लोगों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला रुक सके। निजी से लेकर सरकारी महकमे के चिकित्सकों से वह मरीजों का इलाज करा चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी गांव में मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके कारण ग्रामीण अधिक दहशत में हैं।