यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जेइ-एइएस के बाद अब डेंगू की दस्तक
जागरण संवाददाता, बस्ती : जापानी मस्तिष्क ज्वर तथा एक्यूट इंसेफ्लाइटिस ¨सड्रोम यानी एइएस की मार झेल र

जागरण संवाददाता, बस्ती : जापानी मस्तिष्क ज्वर तथा एक्यूट इंसेफ्लाइटिस ¨सड्रोम यानी एइएस की मार झेल रहे जिले में अब डेंगू ने भी दस्तक दे दी है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग सकते में है। हालांकि विभाग अपनी तैयारी को संपूर्ण बता रहा है, मगर बीमारी के लिए दूषित जल पर ठीकरा फोड़ रहा है। पानी के लिए वह जल निगम को दोषी बताने में जुटा है।
शहर से लेकर गांव तक जेइ-एइएस ने अब तक 53 लोगों को अपनी चपेट में लिया है। यह सब चल ही रहा था कि इसी बीच सदर ब्लाक के ग्राम गनेशपुर में डेंगू से पीड़ित गांव की चार वर्षीय आयशा खातून पुत्री मोहम्मद शकील का मामला भी सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग इस मरीज को पूरी तरह स्वस्थ बता रहा है, मगर जेइ-एइएस के बीच डेंगू की दस्तक से उसके होश उड़े हुए हैं। यह अलग बात है कि विभाग शहर से लेकर दूर दराज गांव में स्थापित अपने स्वास्थ्य केंद्रों को बीमारी से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार बताया है।
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यह है आंकड़ा
जिले में जेइ के तीन मरीज मिले हैं, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। जबकि एइएस के पचास रोगी पाए गए इनमें से 13 काल के गाल में समा गए हैं। इसके अलावा डेंगू का भी एक मरीज अब तक आया है। यानी जेइ-एइएस के बीच डेंगू भी स्वास्थ्य विभाग को चुनौती दे रहा है। फीजिशियन डा. एमके सिन्हा कहते हैं कि जापानी मस्तिष्क ज्वर व डेंगू तो मच्छरों से होता है। ऐसे में इससे बचाव जरूरी है, मगर एक्यूट इंसेफ्लाइटिस ¨सड्रोम का अधिक कारण पानी की गड़बड़ी है। ऐसे में इससे बचाव के लिए सफाई व पानी की शुद्धता आवश्यक है। जरूरत इस बात की है कि लोग अपने घरों के आसपास पानी न एकत्रित होने दें। यदि ऐसा संभव नहीं है तो एकत्रित पानी में जला हुआ डीजल डालें, जिससे लार्वा न पैदा हों। पीने वाले पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद ही पीएं।
