यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मुफ्त इलाज का दावा हवा-हवाई
बस्ती : एक्यूट इंसेफ्लाइटिस व जापानी मस्तिष्क ज्वर के रोगियों का सरकारी चिकित्सालय में मुफ्त इलाज ह

बस्ती : एक्यूट इंसेफ्लाइटिस व जापानी मस्तिष्क ज्वर के रोगियों का सरकारी चिकित्सालय में मुफ्त इलाज होगा। यह निर्देश सरकार का है, मगर इस निर्देश का पालन करने वाले सरकारी चिकित्सालयों में नहीं किया जा रहा है। चिकित्सक मनमाने ढंग से मरीजों को चिकित्सालय की पर्ची पर बाहर की दवाएं धड़ल्ले से लिख कर मंगा रहे हैं। यही नहीं जांच की भी व्यवस्था चिकित्सकों ने बाहर से कर रखी है। बाहर के पैथालोजी व डायग्नोस्टिक सेंटर मरीजों के परिजनों से अच्छी खासी रकम वसूल रहे हैं। जिला चिकित्सालय के निकट स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर मरीजों को चिकित्सकों के पर्चो के सहारे लूटा जा रहा है।
मिनी पीजीआई के नाम से विख्यात ओपेक चिकित्सालय की दशा कुछ ऐसी ही है। यहां सरकारी बेड को छोड़ मरीज के लिए कुछ भी उपलब्ध नहीं है। यह अलग बात है कि ओपेक चिकित्सालय कैली में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड व सिटी स्कैन की व्यवस्था सस्ते दर पर उपलब्ध है और एइएस अथवा जेई के मरीजों को यहां मुफ्त जांच भी कराने का सरकार का निर्देश है। यही निर्देश सरकारी चिकित्सालय के पैथालोजी को भी है। इसके बावजूद उक्त मरीजों को कोई सुविधा मुफ्त नहीं मिल सकती। क्योंकि चिकित्सक व तंत्र सरकार के निर्देश को रद्दी की टोकरी में डाल मनमाने ढंग से मरीज के परिजनों का शोषण कर रहे हैं।
मरीजों का दर्द सुनिए
एईएस- जेई वार्ड में भर्ती 3 वर्ष की सरस्वती के पिता भानपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम करमहिया निवासी बद्री बताते हैं कि उनकी बेटी 2 जुलाई को भर्ती हुई थी। उसे चिकित्सक ने एइएस का रोगी बताया है। शहर के एक डायग्नोस्टि सेंटर पर तीन सौ रुपये में बेटी का एक्सरे चिकित्सक के सुझाव पर कराया, जबकि सारी दवाएं भी बाहर से खरीदा है। चिकित्सक ने सर्फ तक बाहर से मंगाया और तब जाकर बेटी का इलाज शुरू हो सका है। यहां तो केवल सरकारी बेड ही मिला है।
इसी वार्ड में भर्ती पुरानी बस्ती के डफाली टोला का 11 वर्षीय प्रेम सागर के पिता सुखसागर, हरिहरपुर बनकटी निवासी वंश बहादुर का डेढ़ वर्षीय बेटा आजाद, श्रीपाती देवी ने बताया कि उनके बीमार बच्चे को चिकित्सक ने पीलिया बताया था और पैथालोजी जांच के लिए जिला चिकित्सालय के निकट स्थित एक सेंटर पर दो बार जांच कराना पड़ा। 1100 रुपये जांच में ले लिया गया।
मुंडेरवा के कुर्थिया निवासी 12 वर्षीय मनीष कुमार पुत्र ओम प्रकाश का इलाज चिकित्सक कर रहे हैं। उक्त लोगों ने बताया कि अब तक हजारों रुपये दवा के नाम पर खर्च किया जा चुका है। चिकित्सालय से एक पाई की दवा भी नहीं मिली है। चिकित्सक तो यह कहते हैं कि यहां कोई दवा नहीं है। बुखार, एंटी बायोटिक व अन्य दवाएं बाहर की दुकानों से रुपया देकर खरीदा गया है।
बनकटी के पिपरा गांव निवासी चार माह के रुद्र प्रताप पुत्र अश्वनी का इलाज चिकित्सालय में 30 जून से शुरू हुआ। अब तक वे 1400 रुपये की दवा खरीद चुके हैं। चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड कराने का सौ रुपया जमा कराया गया, जबकि बुखार, पेटदर्द व विटामिन सीरप चिकित्सक ने बाहर से मंगाया है।
वार्ड में यह है व्यवस्था
ओपेक चिकित्सालय कैली में एइएस व जेई वार्ड में तीन चिकित्सक डा. विजय गुप्त, डा.विशाल चौधरी व डा.विनोद कुमार तैनात हैं। यहां कुल छह मरीज गुरुवार तक भर्ती कराए गए हैं।
ओपेक चिकित्सालय कैली में अत्याधुनिक तकनीक की एक्सरे सुविधा के अलावा अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन व अत्याधुनिक मशीनों से पैथालोजिकल जांच की व्यवस्था है।
इनकी सुनिए
ओपेक चिकित्सालय कैली के निदेशक डा. एके राय की सुनें। कहते हैं कि चिकित्सालय में जेइ-एइएस के मरीजों के अलावा अन्य मरीजों का भी मुफ्त इलाज होता है। सरकार इस चिकित्सालय में संसाधनों के अलावा दवाएं भी उपलब्ध करा रखी है। यदि किसी को बाहर से जांच आदि कराने के लिए चिकित्सक ने लिखा है तो इसकी जांच करा ली जाएगी। मरीजों ने आज तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
