यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जिंदगियां डकार रहा 'डेंजरस' डेंगू

जागरण संवाददाता, बरेली : एक के बाद एक मौत और आंकड़ा भी महज 48 घंटे के अंतराल का। ज्यादा नहीं, महज दो महीने ही अंगुलियों पर गिने थे हमने, पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस डेंगू की मौजूदगी को स्वास्थ्य विभाग सिरे से नकार रहा है, वह अभी तक 30 जिंदगियां निगल चुका है। आंकड़े कुछ भी बोलें। हालात का अंदाजा अस्पतालों की भीड़ बयां कर सकती है। ब्लड बैंक में तीमारदारों की लंबी कतार और कुछ अंतराल पर उठती अपनों की चीत्कार बता सकती है। सिलसिला अभी थमा नहीं है। शुक्रवार को एक और डेंगू संदिग्ध मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
पहले हालिया मौत की कहानी। नवाबगंज के मुहल्ला गंगवार कॉलोनी निवासी प्रेमवती देवी (45 वर्ष) प्राथमिक विद्यालय शाहपुरजी सुखराय में प्रधानाध्यापिका थीं। तेज बुखार के चलते सोमवार को नगर के निजी अस्पताल मे भर्ती कराया गया। यहां उन्हें चिकित्सकों ने डेंगू करार दिया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज मे भर्ती कराया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। गुरुवार को उनकी सांसे थम गईं। प्रेमवती ही नहीं, इससे पहले एबीएसए अनुराग कटियार भी डेंगू की चपेट में आईं थीं। उनकी भी एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
जांच रिपोर्ट भी दबाई
स्वास्थ्य विभाग डेंगू की महामारी को लेकर कितना लापरवाह रहा, इसका नमूना उसकी कार्यप्रणाली से उजागर होता है। निजी अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ आई तो स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को नोटिस थमाकर सीधे डेंगू करार देने पर रोक लगा दी। तर्क दिया, लोग भयभीत न हों। खुद सीएमओ पूरे सीजन भर डेंगू को नकारते रहे। वहीं जांच के लिए लखनऊ भेजे गए 144 रक्त नमूनों में से 45 पॉजिटिव पाये गए तो पूरे विभाग को सांप सूंघ गया। डेंगू की रोकथाम के लिए कोई गंभीर कदम उठाने के बजाए तीस फीसदी मरीजों के डेंगू पीड़ित होने की जांच तक फाइलों में दबा दी गई।
सीएमओ का पुराना राग, डेंगू नहीं
जिले में डेंगू के चलते एक दो नहीं बल्कि तीस से ज्यादा संदिग्ध मरीजों की बीते दो महीनों में मौत हो चुकी है। सीएमओ विजय यादव अभी भी डेंगू से मौतों की बात स्वीकार नहीं करते हैं। बोले, डेंगू से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई। हां, वायरल और दूसरी दिक्कतों के चलते कुछ मौतें जरूर हुई हैं। इंतजाम के बाबत पूछने पर वे कहते हैं कि जब बीमारी ही नहीं है तो इंतजाम कैसा।
कहां कितनी मौतें
नवाबगंज
- बाबूराम, मुहल्ला भंट्टा
- इम्तयाज अहमद, मुहल्ला काहरान
दुनका
- सिंकू, बसई
- ताराबती, फिरोजपुर
- रामकृष्ण, धनेली
बहेड़ी
जावेद, मुहल्ला बाग
मरियम, मुहल्ला शेरनगर
नवाज अमीर, इस्लाम नगर
नाजिया बेगम, शेरनगर
शाहजा बेगम, शेरनगर
भोजीपुरा
राजेश, ग्राम नगरा
फरीदपुर
इकबाल, मुहल्ला मिर्धान
फतेहगंज पूर्वी
सारिका अग्रवाल, मुहल्ला साहूकारा
बरेली-
वकुल अग्रवाल, रानी, सुदामा देवी, बाबूलाल, अनीता रस्तोगी, वीरेंद्र जौहरी, बिहारी लाल, राजू भाई, माया कश्यप, आसिफ उस्मान अल्वी, नरगिस, जाहिदा बेगम, मोहम्मद वसीम, पूनम और सुभाष नगर निवासी पंकज जौहरी
कौन देगा हिसाब
स्वास्थ्य विभाग की बात पर यदि यकीन कर भी लिया जाए तो तीस से ज्यादा मौत का हिसाब कौन देगा? आखिर दो महीनों में ऐसा कौन सा वायरल फैला जिसने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को मौत की नींद सुला दिया।
निगम और पालिका भी जिम्मेदार
डेंगू संदिग्ध मरीजों की मौत के लिए नगर निगम और नगर पालिकाएं भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। पूरे सीजन में मच्छर मारने की जिम्मेदारी उठाने वाले संस्थानों ने धेला भर भी काम नहीं किया। न कहीं फॉगिंग कराई और न ही साफ सफाई पर ध्यान दिया गया। हालत ये रही कि कहां कितने मच्छरों का घनत्व है और किस किस्म के मच्छर हैं इसकी जानकारी तक नहीं जुटाई गई।
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर
