यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नोटबन्दी ने रोकी जियारत की राह
बाराबंकी:नोटबंदी का असर इन दिनों सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर भी सा़फ दिखाई दे दिया। यहां

बाराबंकी:नोटबंदी का असर इन दिनों सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर भी सा़फ दिखाई दे दिया। यहां आने वाले बाहरी जायरीन इन दिनों काफी कम हो गए है। जिसका असर सिन्नी, प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों से लेकर कव्वालों और भिखारियों की कमाई पर पड़ा है।
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर आम दिनों में प्रतिदिन हजारों की संख्या मे दूरदराज के जायरीन जियारत के लिए आते हैं।नोट बन्दी के दिन से गैर प्रांतों से आने वाले जायरीन की संख्या में भी काफी कमी आयी है।जिससे कभी हर समय भरी रहने वाली मजार रोड अपेक्षाकृत
सन्नाटे में डूबी है। मजार पर सिन्नी,चादर,फूल बेचने वालों का धंधा मंद है।जायरीन से कुछ पाने की आस लगाए भिखारी भी काफी मायूस हैं। जायरीन की कम आमद से दुकानदारी पर काफी असर पड़ा है।कव्वाल वसी अहमद बताते हैं कि पहले तीन चार सौ रूपये नजराना मिले जाता था।नोट बन्दी के बाद से चालीस -पचास रूपये ही मिल पाते हैं जिससे परिवार चलाना भी दूभर है।
नोट बंदी से घर वापसी भी मुश्किल
देवा:मजार पर कुछ ऐसे जायरीन भी हैं जो नोट बदल न पाने से अपने घर नही लौट पा रहे हैं।श्रीनगर कश्मीर से आये सनाउल्लाह,अब्दुल अहद और अनंतनाग के रफीक मीर करीब एक सप्ताह पहले 16 सदस्यों के साथ जियारत को आये थे।अचानक नोटबंदी से सबके सामने समस्या खड़ी हो गयी।रफीक ने बताया कि मजार कमेटी ने कुछ नोट बदलवा दिए जिससे आज का मंहगे दामों पर तत्काल टिकट लिया है।सनाउल्ला,रफीक मीर जैसे कई और भी जायरीन पैसे की कमी से जूझ रहे हैं।
नहीं मिली धनराशि: सफेदाबाद स्थित बैंक ऑफ इंडिया में दिन भर से लाइन में लगे रहे लोगो एवं महिलाओं को बैरंग लौटा दिया गया। पहले बताया गया कि तीन बजे के बाद धनराशि दी जाएगी मगर नहीं दी गई। एटीएम भी काम नही आए।
