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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 05, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संक्रामक रोग से महिला की मौत, दर्जन भर पीड़ित

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Published: Wed, 05 Jun 2013 12:27 AM (IST)Updated: Wed, 05 Jun 2013 12:28 AM (IST)

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सतरिख (बाराबंकी) : ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं गर्मी के दिनों में संक्रामक रोग के फैलाव को रोक पाने में असफल हो जाती हैं। स्वास्थ्य महकमा है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। आमजनों की सेहत से खिलवाड़ थम नहीं रहा है।

बंकी ब्लॉक के जाटा बरौली सीएचसी के अंतर्गत तिंदवानी गांव में संक्रामक रोग के कहर से तबाही मची है। एक महिला की मौत हो चुकी है। दर्जन भर लोग चपेट में हैं, लेकिन इलाज के नाम पर लाल पीली गोली तक नसीब नहीं है। सीएचसी से महज कुछ सौ कदम दूरी पर स्थित तिंदवानी गांव में एक पखवारे से संक्रामक रोग ने पांव पसार रखा है। चपेट में आई श्रीराम की पत्‍‌नी मोनी (26) ने कई दिनों तक संघर्ष किया। इलाज के लिए सीएचसी गई चिकित्सक नहीं मिले। इस पर परेशान होकर मोनी अपने पिता के घर लखनऊ गंगागंज चली गई। जहां सोमवार को उसकी मौत हो गई। श्रीराम का कहना है कि अस्पताल में दवाई तो दूर डॉक्टर भी समय से नहीं मिलते। यहां सुमिरन (67), सुरेश की पत्‍‌नी लज्जावती (40), दुर्जन की पत्‍‌नी कलावती (61), हरीलाल की पुत्री शिवानी (7), कुनाल (5), पूजा (3), गंगा की पुत्री रूमा (18) सहित दर्जन भर से अधिक ग्रामीण पखवारे भर से संक्रामक रोग की चपेट में हैं। कुछ उल्टी दस्त तो कुछ पेट में तेज दर्द से छटपटा रहे हैं। इससे गांव में कोहराम मचा है।

रूमा के पिता गंगा का आरोप है कि वह पुत्री का इलाज कराने के लिए स्मार्ट कार्ड लेकर सीएचसी गया था। इलाज किए बगैर कार्ड लेकर बैरंग लौटा दिया। कार्ड अभी तक वापस नहीं किया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने पर मंगलवार को सीएचसी से एक व्यक्ति आया था। बिना परीक्षण व दवाई वितरण के लौट गया। अधीक्षक डॉ. विश्वनाथ मदेसिया का कहना है कि टीम गांव भेजी गई है, लेकिन बीमारी की कोई बात है नहीं।

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