यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 10, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ठंड का कहर जारी, अधिवक्ता समेत चार की मौत

जागरण कार्यालय, बलरामपुर :
दिन में निकली धूप से शाम को गलन और बढ़ गई। बुधवार को भी पारा 2.8 डिग्री से ऊपर नहीं गया। रात में तापमान और नीचे सरक गया। ठंड से अधिवक्ता समेत चार लोगों की मौत हो गई। सर्द हवाओं का कहर बरकरार है। जिले में अबतक ठंड से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। हांलाकि प्रशासन एक भी मौत नहीं मान रहा है।
बुधवार को भी बर्फीली हवाओं कहर बरकरार रहा। सुबह की धुंध देख लोग घरों से देर से निकले। दोपहर में हल्की धूप निकली, लेकिन सर्द हवाओं की ठिठुरन कम नहीं हो सकी। गुनगुनी धूप से शाम को गलन और बढ़ गई। सड़कों पर शाम होते ही सन्नाटा पसर गया। सरकारी कार्यालयों में भी कर्मचारियों की संख्या कम दिखी। मंगलवार की रात काफी ठंड रही। इस रात ठंड लगने से अधिवक्ता रामजी श्रीवास्तव की तबियत अचानक बिगड़ गई। कुछ देर में उन्होंने दम तोड़ दिया। मुहल्ला सराय निवासी जिलेदार वर्मा की पचपन वर्षीय पत्नी की भी मौत ठंड लगने से हो गई। दोनों मौतें मंगलवार की रात में हुई हैं।
संवादसूत्र तुलसीपुर के अनुसार ओड़ाझार निवासी रमेश कुमार (36) पुत्र मेवालाल और कुतबुननिशा (65) पत्नी कमरूद्दीन की मौत ठंड लगने से हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक ठंड से दानों की हालत खराब हो गई जिससे देर रात मौत हो गई। दोनों पहले से भी अस्वस्थ्य चल रहे थे।
दूसरी तरफ ठंड से बचाव के लिए प्रमुख स्थानों पर जल रहे अलाव निराश्रितों का सहारा बने हैं। निराश्रितों के लिए कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की गई जहां वे रात बिता सकें। अस्थाई रैन बसेरा की भी व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। स्वैच्छिक संस्थाओं ने भी ठंड से बचाव के लिए अबतक कोई पहल नहीं की है। नगरपालिका द्वारा ही प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। ठंड से जानवर भी बेहाल हैं। अलाव पास ही जानवरों का झुंड रात में बैठा रहता है। जिला अस्पताल में ठंड से पीड़ित मुहम्मद सलीम पुत्र मुहम्मद हनीफ का उपचार चल रहा है। झारखंडी रेलवे स्टेशन पर ठिुठरते हुए एक झुंड में बैठकर यात्री ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे थे। यहां बाहर जल रहे अलाव किनारे लोगों के साथ मवेशी भी खड़े थे। अपर जिलाधिकारी हरिकृष्ण नाथ त्रिपाठी ने बताया अबतक जिले में ठंड से एक भी मौत नहीं हुई है। ठंड से बचाव के लिए विभिन्न स्थलों पर अलाव की व्यवस्था प्रतिदिन कराई जा रही है। निराश्रितों को कंबल दिए गए हैं।
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