यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पचपेड़वा में तीन दिन में ठंड से सात की मौत

बलरामपुर : बर्फीली हवाओं ने कहर बरकरार है। पचपेड़वा ब्लॉक में तीन दिन के भीतर ठंड से सात लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इस तरह जिले में ठंड से अब तक 13 लोगों की मौत हुई है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक एक भी मौत की पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन का ठंड से बचाव का प्रयास सिर्फ गिनती के स्थानों पर अलाव जलाने तक सिमटा है। अस्पतालों में ठंड से पीडि़त मरीजों की संख्या बढ़ी है। हांड़कंपा देने वाली ठंड से बचाव के सरकारी इंतजाम नाकाफी हैं। जबकि मंगलवार का तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
सर्द पछुवा हवाएं बर्फीली हवा का अहसास करा रही हैं। जानलेवा सर्द हवाओं ने कंपकंपी बढ़ा दी है। ठिठुरन बढ़ने से लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। ठंड का कहर पचपेड़वा विकास खंड के भगवानपुर खादर पर अधिक बरपा है।
संवादसूत्र पचपेड़वा के अनुसार भगवानपुर खादर निवासी फखरुद्दीन ने बताया कि उनके गांव के नरदाहे गौतम (50) की मौत सोमवार की रात में ठंड लगने से हो गई। सदवानगर निवासी शेखर ने बताया कि उनके गांव से ठाकुर यादव (80), कोयला गौतम (45), ठाकुर प्रसाद चौधरी (70), मालती (60) और गोगी के पांच दिन के बच्चे की मौत ठंड लगने से हुई है। सभी मौतें दो दिन के अंदर हुई हैं। मृतकों का उपचार स्वास्थ्य केंद्र भगवानपुर खादर में हुआ था। ठीक होने पर परिवारीजन घर लेकर चले गए थे। धनखरपुर हाटी निवासी मिनकू तिवारी ने बताया कि उनके गांव के दुलारे (70) पुत्र सोमई की मौत सोमवार की रात में ठंड लगने से हुई है। दुलारे की रात में पेट दर्द शुरू हुआ और दम तोड़ दिया। प्रशासन ठंड से मौत होने की बात स्वीकारने को तैयार नहीं है। उपजिलाधिकारी तुलसीपुर आरके सिंह ने बताया कि मौतों की सूचना मिली है। भगवानपुर खादर में मौत के कारणों की सच्चाई जानने के लिए राजस्व की टीम भेजी गई है। रिपोर्ट मिलने पर मौत के कारणों का पता चल सकेगा।
दूसरी ओर मंगलवार को दिन का तापमान 2.4 डिग्री रहा। रात का तापमान और नीचे चल गया। दिन में कुछ देर के लिए धूप निकली, लेकिन ठंड पर उसका असर नहीं दिखा। नगर क्षेत्र में नगरपालिका द्वारा अलाव जलवाए गए हैं। ग्रामीण बाजारों में राजस्व विभाग द्वारा अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। मुख्यालय पर बना एक मात्र रैनबसेरा में इस हांड़कपा देने वाली ठंड में भी कोई व्यवस्था नहीं दिखी। रैनबसेरा का ताला बंद ही है। जिला प्रशासन द्वारा आमजन व निराश्रितों को ठंड से बचाव के लिए अस्थाई रैनबसेरा की व्यवस्था नहीं की गई।
संवादसूत्र, हरैय्या सतघरवा के अनुसार ललिया, शिवपुरा, बलदेवनगर आदि बाजारों में अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ठंड के कारण लोग घरों से बाहर कम हीं निकल रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधीक्षक डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि तीन दिन के अंदर दो दर्जन ठंड पीडि़तों का उपचार किया गया। पेट दर्द के अधिक मरीज अस्पताल आ रहे हैं।
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