यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
फिर गई मासूम की जान, अस्पताल में हंगामा

बहराइच : जिला चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड में मासूमों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज फिर चिकित्सकों की लापरवाही से एक मासूम की जान चली गई। परिवारीजनों ने चिकित्सक और तैनात स्टाफ नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। चिल्ड्रेन वार्ड की स्वास्थ्य सेवाएं करीब घंटे भर ठप रहीं। सूचना पाकर मुख्य चिकित्साधीक्षक व कानूनगोपुरा चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे और समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया।
बुधवार को जिला चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड में कोतवाली देहात क्षेत्र के त्रिवेदीपुरवा शेखदहीर निवासी अहम(2) पुत्र दुर्गेश कुमार को परिजनों ने तेज बुखार व संक्रमण के कारण इलाज के लिए भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज में चिकित्सक और स्टाफ नर्स द्वारा लापरवाही की गई। जिससे बच्चे की हालत बिगड़ गई और शाम को उसने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा करने लगे। इस घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जुट गई। सूचना पाकर मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.माहेश्वरी पांडेय व चौकी प्रभारी कानूनगोपुरा तेजबहादुर सिंह सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंचे। समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि काफी गंभीर हालत में बच्चे को लाया गया था। चिकित्सकों ने प्रयास किया, लेकिन वह बच नहीं सका। इसे लापरवाही कहा जाना गलत है।
मासूमों की मौत पर जागरण ने पहले भी आगाह किया
बहराइच : छह महीने में 96 मासूमों की मौत। 'जागरण' ने 'सब कुछ है फिर भी जान जा रही मासूमों की' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड की कार्यशैली और खामियों को इंगित करते हुए बताया गया था। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन की ओर से इस बार भी कोई गंभीर कदम नहीं उठाए गए। नतीजा आज फिर एक मासूम की जान चली गई। बताते चलें कि चिल्ड्रेन वार्ड में सरकार द्वारा दी गई बेहतरीन मशीनें मौजूद हैं पर विशेषज्ञों के न होने से यह मशीने जंग खा रही हैं। मासूमों की मौत हो रही है। स्पेशल केयर यूनिट बच्चों के लिए बनी हुई है। उसमें बेहतर से बेहतर सुविधाएं हैं। फिर भी हालात जस के तस हैं। विशेषज्ञों के न आने से यह मशीनें सफेद हाथी बनी हैं और मासूमों की मौत की एक बड़ी वजह भी है।
