यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 05, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सब कुछ है फिर भी जा रही जान मासूमों की

बहराइच:
जनवरी से अब तक जिला चिकित्सालय में 92 मासूमों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा। कारण चाहे कुछ भी हो, पर 6 माह में इतनी मौतें बता रही हैं कि जिला अस्पताल में सबकुछ सही नही है। कुछ न कुछ गड़बड़ियां जरूर हैं। जिला चिकित्सालय के स्पेशल केयर यूनिट ने वेंटीलेटर, मानीटर समेत कई अत्याधुनिक मशीनें लगी हुई हैं। लेकिन अभी तक इस यूनिट को चालू नहीं किया जा सका है। इतनी मौतें अस्पताल की 'सरकारी कार्यशैली' को उजागर करता है।
जिला चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड में जनवरी से अब तक 96 मासूमों ने दम तोड़ा है। यह हम नहीं कह रहे हैं। अस्पताल का 'डेथ रजिस्टर' बता रहा है। बीते जून माह में एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत हुई। आखिर इन मौतों के लिए जवाबदेह कौन है? अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड के स्पेशल केयर यूनिट में लगी अत्याधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। इसमें गंभीर रूप से बीमार एवं सांस लेने में दिक्कत होने वाली मरीजों को कृत्रिम सांस देने के लिए की व्यवस्था है। वेंटीलेटर मशीन लगी हुई है। हृदय गति, ब्लड प्रेशर, शरीर का तापमान, नाड़ी की गति आदि मापने के लिए मानीटर मशीन समेत नाजुक बाल रोगियों को दवा देने एवं उसकी मात्रा तय करने के लिए 'फ्लोमीटर', बाल रोगियों के फेफड़े व सीने में जकड़न व विजातीय द्रव्य निकालने के लिए 'सेन्ट्रल सक्शन' तथा शिशुओं के तापमान पर नियंत्रण रखने के लिए 'फोटोथेरेपी' मशीनों अत्याधुनिक बिस्तर के साथ जुड़ी हुई हैं। फरवरी माह में तैयार यह यूनिट विशेषज्ञों के अभाव में अभी तक नहीं चल पाई है। आये दिन तेज बुखार, संक्रमण एवं अन्य गंभीर बीमारियों के कारण मासूम दम तोड़ते रहते हैं। इस चिकित्सालय में गंभीर मरीजों का इलाज सिर्फ लखनऊ रेफर करना है।
क्या कहते सीएमएस
बहराइच : मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.महेश्वरी पांडेय ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड के स्पेशल केयर यूनिट में मशीनें फरवरी में ही लग गई थी। विशेषज्ञों के अभाव में यूनिट का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। इस यूनिट के संचालन के लिए चार बाल रोग विशेषज्ञ, चार एनेथेटिस्ट, दस स्टाफ नर्स, चार वार्ड ब्वाय, चार स्वीपर, एक कम्प्यूटर आपरेटर की जरूरत है जिसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
