यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 19, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
छछरपुर में बुखार ने बरपाया कहर

जागरण कार्यालय, बड़ौत : छछपरपुर गांव में इन दिनों बुखार ने कहर बरपाया हुआ है और सैकड़ों ग्रामीणों व बच्चों को अपनी चपेट में ले रखा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन मरीजों की मदद करने की बजाय उन्हें मौत के मुंह में धकेलने का काम कर रहा है। ग्रामीण अंचल में समुचित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा करने वालों को ये तस्वीरें आइना दिखाने और यह बताने के लिए काफी हैं कि जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं का कद कितना बौना है।
छछरपुर गांव में पिछले करीब 10 दिनों से बुखार का प्रकोप एकाएक बढ़ गया है। गांव में लगभग हर परिवार में एक सदस्य बुखार की चपेट में है। तालाब, पोखर और खेतों के नजदीक वाले परिवार ज्यादा प्रभावित हैं। गांव निवासी विकास कुमार घर पर ही उपचार करा रहे थे और नीम के पेड़ से बोतल लटकाकर उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। यही हाल अनिता का था और उन्हें भी घर में ही ग्लूकोज लगाया जा रहा था। इसके अलावा गांव निवासी सुनील, उसकी पत्नी पूनम, बेटा अजय और विजय बुखार से पीड़ित मिले। इसके अलावा विकास, अनिता, कृष्णा और इनके पोते सूरज व लविश भी बुखार से ग्रसित मिले। पड़ोस में ही 10 वर्षीय अमित व उसकी बहन सोनम, नरेश कुमार, कमला, रीता, सन्नी, अनुज, अंकुर समेत सैकड़ों ग्रामीण बुखार से पीड़ित मिले।
यह कैसा मेडिकल कैंप
ग्राम प्रधान महीपाल सिंह के घेर में शनिवार को डाक्टरों की टीम पहुंची। एक घंटे के भीतर ही दो सौ से ज्यादा मरीज जांच के लिए कैंप में पहुंचे, लेकिन यहां आए डाक्टर तो खानापूर्ति में लगे थे। मरीजों की नब्ज पकड़कर, उनसे मर्ज पूछकर डाक्टर साहब केवल दवा दे रहे थे। न तो डाक्टरों के पास बुखार नापने के लिए थर्मामीटर था और न ही स्थेटिस्कोप। कुछ मरीजों को रक्त चाप की बीमारी थी, लेकिन इनकी भी बिना जांच पड़ताल किए बस दवाएं बांटी जा रही थी। इस बात को लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश पनप गया। ग्राम प्रधान महिपाल, गांव निवासी सुरेश और रविंद्र ने आरोप लगाया कि मेडिकल जांच के नाम पर बस गोलियां दी जा रही हैं। इस मामले में एसडीएम और सीएमओ से शिकायत की बात कही।
लखनऊ भी नहीं हुई सुनवाई
ग्राम प्रधान ने बताया कि करीब 20 दिन पूर्व उन्होंने लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग के एक मंत्री को फोन किया था। इसके बाद गांव में दो डाक्टर पहुंचे थे और कुछ मरीजों के खून के सेंपल जांच के लिए ले गए थे। अभी तक रिपोर्ट तक नहीं आई है। गांव में न तो मच्छरों की दवा का छिड़काव हुआ है और न ही तालाबों में दवा डलवाई गई है।
इन्होंने कहा..
संसाधनों की कमी अस्पताल में नहीं है। जो डाक्टर बिना उपकरण के गए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। गांव में डाक्टरों की पूरी टीम एंबुलेंस और अन्य सुविधाओं के साथ सोमवार को ही भेजी जाएगी। गांव में फॉगिंग भी कराई जाएगी।
-डा.जेपी शर्मा, सीएमओ बागपत।
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