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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 01, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डायरिया से बचने का नहीं कोई इंतजाम

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Published: Thu, 01 May 2014 01:32 AM (IST)

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जासं, बदायूं : गर्मी बढ़ने के साथ बीमारियों ने भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। खासकर डायरिया लोगों को अधिक दिक्कतों में डाल रहा है। डायरिया से अब तक ब्लाक सलारपुर के गांव हरी नगला में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है और दो दर्जन बच्चे इससे पीड़ित हैं, लेकिन इस रोग के समुचित इलाज के लिए जिला अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है।

अगर आपके किसी बच्चे को डायरिया हो तो इसका सही इलाज आपको जिला अस्पताल में नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य महकमा इसको लेकर कतई गंभीर नहीं है। इसी की वजह से पूरे जिला अस्पताल में चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। साफ-सफाई नाम की कोई व्यवस्था न तो कहीं परिसर में दिखती है न ही वार्डो में। डायरिया रोग से डाक्टर भले ही साफ-सफाई की बात मरीजों को बताते हों, लेकिन खुद इसको लेकर गंभीर नहीं है।

अस्पताल में डायरिया जैसे जानलेवा बीमारी के लिए न ही कोई अलग से कोई वार्ड नहीं बनाया गया है। वार्डो में सीएमओं के आदेश के बावजूद बेडों पर चद्दर तक नहीं डाली जाती है। डायरिया रोग से पीड़ित अस्पताल आने वाले मरीजों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय सीधे गंदगी युक्त वार्डो में भर्ती कर दिया जाता है। इससे मरीज ठीक होने के बजाय और बीमार हो जाते हैं। कई मरीज अस्पताल की अव्यवस्थाओं से खिन्न होकर निजी नर्सिग होमो का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

हरी नगला के गांव में तीन बच्चे का सही समय से इलाज न मिलने की वजह से मौत हो गई। डायरिया रोग से गांव के डौली (7) अब्बू (2) अंकित (4) की मौत हो गई। जबकि सुमित, अमित, कविता, बबिता, संतोष, बृजपाल, आर्यन, कैलाश, प्रमोद, शीतल, मदनपाल समेत दो दर्जन बच्चे गंभीर रुप से बीमार है। इसकी वजह से पूरा गांव भयभीत है।

स्वास्थ्य टीम ने डायरिया से प्रभावित गांव का निरीक्षण कर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली, लेकिन अब भी इस गांव में कई बच्चों की हालात चिंताजनक बनी हुई है। गांव में भले ही कई दिन से कई बच्चे डायरिया से पीडि़त हैं स्वास्थ्य महकमा इसको लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए बीते मंगलवार को टीम ने कुछ दवाइयां देकर अपने कामों की इतिश्री कर ली, लेकिन इनमें कुछ की हालात बुधवार को भी गंभीर बनी हुई है। विभाग ने दुबारा इस गांव में जाना मुनासिब नहीं समझा। डायरिया प्रकोप गांव में बीते कई दिन से जारी है। इसकी जानकारी गांव के लोग स्वास्थ्य विभाग को देते रहे मगर कोई भी कर्मचारी गांव नहीं गया।