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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रहस्यमय बुखार ने ली एक और महिला की जान

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Published: Sat, 30 Aug 2014 08:07 PM (IST)

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जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : कोरांव में फैली बीमारी अबूझ पहेली बनी हुई है। मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसको लेकर ग्रामीण दहशत में हैं तो विभागीय अधिकारी परेशान। वह एक गांव पहुंचकर इलाज शुरू करते हैं, तो बीमारी दूसरे गांव में दस्तक दे देती है। शनिवार को बीमारी कोरांव के मिश्रपुर गांव पहुंच गई और एक महिला को अपना शिकार बना लिया। देखते ही देखते गांव में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। इसको लेकर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है।

बता दें कि चार दिन पहले कोरांव ब्लाक में रहस्यमय बीमारी से आठ बच्चों की मौत हो गई थी। बढ़वारी कला गांव में बीमारी ने सबसे पहले दस्तक दी। संतलाल के तीन वर्षीय बेटे नीरज को अपना शिकार बनाया। इसके बाद राधेश्याम के चार वर्षीय बेटे अमरेश, तौलन की तीन वर्षीय बेटी पिंकी, मिठाई लाल की एक माह की पुत्री रनिया और किशोरी लाल की बेटी रोशनी को भी बीमारी ने देखते ही देखते अपना शिकार बना लिया। पड़ोसी गांव धाव निवासी लाल जी की एक वर्षीय पुत्री दीपांशु को भी बीमारी ने रात को ही अपना शिकार बना लिया। ललऊ की पुत्री ललिता 9 की भी बीते मंगलवार की शाम इलाज के दौरान मौत हो गई। लेड़ियारी स्थित नीबी गांव में गीता देवी 15 पुत्री रणधीर कुमार की भी बुखार से मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग अभी इन गांवों में अभियान चला ही रहा था कि बीमारी ने रत्यौरा गांव को अपना नया ठिकाना बना लिया। बीमारी की चपेट में आकर सत्यनारायण आदिवासी का आठ वर्षीय पुत्र सत्यम सहित एक अन्य की मौत हो गई। वहीं दो दर्जन से भी ज्यादा लोग बीमारी की चपेट में आकर इलाज करा रहे हैं।

कोरांव प्रतिनिधि के अनुसार शनिवार को बीमारी बड़वारी कला ग्राम सभा के मिश्रपुर मजरे में पहुंच गई। सोनू वर्मा की पत्‍‌नी रनिया को शुक्रवार को बुखार आया। शरीर में ऐंठन भी हुई। स्थानीय डॉक्टरों से उसका इलाज शुरू कराया गया। शनिवार की सुबह रनिया ने दम तोड़ दिया। इस तरह कोरांव क्षेत्र मे रहस्यमय बुखार से मरने वालों की संख्या 11 पहुंच गई है। गांव के हर्ष 7, हरिकृष्ण 14, वेद प्रकाश 32, पार्वती देवी 40, आशीष 20, लक्ष्मण 15, सीता 5, साधना 4, वंदना 12 भी बुखार से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग लाख जतन के बाद भी अभी यह तय नहीं कर पाया है कि आखिर यह कैसा बुखार है जो चंद घंटों में ही लोगों की जान ले लेता है। लखनऊ से किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज की टीम भी यहां का दौरा कर चुकी है। ब्लड सैंपल लखनऊ ले जाया गया है जहां जांच के बाद यह बीमारी के रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की जा रही है।

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बिन बुलाए आती है, जान लेकर जाती है

-इलाहाबाद से कौशांबी तक तय कर चुकी है सफर

-दोनों जिलों को मिलाकर जा चुकी है 16 जानें

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : रहस्यमय बीमारी सिर्फ इलाहाबाद ही नहीं बल्कि कौशांबी में भी कहर बरपा चुकी है। वहां भी लोगों को बुखार आया और फिर देखते ही देखते उनकी सांसें थम गई। कैसा बुखार था, वहां के डाक्टर भी नहीं समझ पाए।

पिछले दिनों इलाहाबाद के कोरांव तहसील के बढ़वारी कला, धौखर व धाव गांव में रहस्यमयी बुखार से आठ बच्चों की मौत के बाद सनसनी फैल गई। इसके पीछे कारण भी ठोस था। बुखार के साथ बच्चों को कंपकंपी और ऐंठन की शिकायत हुई थी। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कई टीमें गांव पहुंची, लेकिन यह ज्ञात नहीं हो सका कि यह किस प्रकार का बुखार था। कोई इसे टायफाइड बताता तो कोई मलेरिया। स्वास्थ्य अमले ने स्लाइड बनाकर भी जांच की, लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका। हालत यह हो गई कि लखनऊ मेडिकल कॉलेज की टीम को यहां आना पड़ा।

अब नजर डालते हैं कौशांबी पर। यहां के मौली गांव में 23 व 24 अगस्त के बीच रहस्यमय बुखार से आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई। सुरेंद्र पुत्र भइयालाल, संतोष की तीन वर्षीय बेटी, रामचंद्र पुत्र हरीलाल, मरिया पुत्री प्रेमचंद, राममिलन पुत्र रविकुमार, छोटे पुत्र रविशंकर भी बुखार के चपेट में आकर दम तोड़ दिया। इस मामले में भी डॉक्टर अभी तक समझ नहीं पाए कि लोगों को कैसा बुखार आया था। कोरांव व कौशांबी में हुई मौतों में बीमारी के लक्षण एक जैसे थे।

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फैली है अफवाह, रतजगा कर रहे ग्रामीण

कोरांव, इलाहाबाद : कोरांव में रहस्यमय बीमारी ने लोगों में किस कदर तक दहशत पैदा कर दी है कि अब लोग रतजगा कर रहे हैं। अफवाह उड़ी है और उस पर लोग विश्वास कर रहे हैं। गांव के चंदू, भूपति, हरिनारायण, आदित्य प्रसाद आदि का कहना है कि अफवाह है कि बंगाल में किसी परिवार के तीन लोगों की आकस्मिक मौत हो गई है। उन्हीं आत्माओं का टोटका किया गया है। तीनों लाशों को बोलेरो गाड़ी में रखकर छोड़ दिया गया है। कहा गया है कि जिस गांव में यह गाड़ी जाकर रुक जाएगी, उस गांव के सारे लोग धीरे धीरे मर जाएंगे। दस मौतों के बाद काफी संख्या में ग्रामीण इस टोटके पर विश्वास करने लगे हैं। वह रातभर जगह-जगह रास्तों की रखवाली कर रहे हैं कि कहीं बोलेरो उनके गांव आकर रुक न जाए।