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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कोरांव में रहस्यमय बीमारी से आठ बच्चों की मौत

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Published: Tue, 26 Aug 2014 09:46 PM (GMT+05:30)

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जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : जिले के कोरांव ब्लाक में दो दिन के अंदर रहस्यमय बीमारी से आठ बच्चों की मौत हो गई। इसको लेकर क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी सामने आ रही है। जानकारी पाकर डॉक्टर मंगलवार की सुबह गांव पहुंचे जरूर, लेकिन खानापूर्ति करके वापस लौट गए, जिससे बीमारी बेकाबू हो गई। एक गांव से शुरू हुई बीमारी ने आसपास के गांवों को भी अपने चपेट में ले लिया है। इसको लेकर कई गांवों के ग्रामीण दहशतजदा हैं।

कोरांव के बढ़वारी कला गांव में बीमारी ने सबसे पहले दस्तक दी। संतलाल के तीन वर्षीय बेटे नीरज को सोमवार को बुखार की शिकायत हुई। इसके बाद उसका शरीर कांपने लगा। हाथ पैर ऐंठने लगे। उसे इलाज के लिए ले जाया जाता, इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। समझ में ही नहीं आया कि आखिर कौन सी बीमारी से वह ग्रसित हुआ। अभी लोग नीरज की मौत का मातम मनाना शुरू ही किए थे कि पता चला कि गांव के कई और बच्चों को भी इसी तरह की बीमारी ने जकड़ लिया है। इसी गांव के राधेश्याम के चार वर्षीय बेटे अमरेश, तौलन की तीन वर्षीय बेटी पिंकी, मिठाई लाल की एक माह की पुत्री रनिया और किशोरी लाल की बेटी रोशनी (तीन) को भी बीमारी ने देखते ही देखते अपना शिकार बना लिया। मासूमों की मौत से पूरा गांव सिहर उठा। हालात ऐसे थे कि ग्रामीण एक बच्चे की अंत्येष्टि करके वापस लौटते थे तो उन्हें दूसरा बच्चा मृत मिलता। यह सिलसिला सोमवार की आधी रात तक चलता रहा।

अभी यह खबर दूसरे गांव पहुंचती कि, इससे पहले ही पड़ोसी गांव धाव में भी बीमारी फैलने की जानकारी आ गई। धाव निवासी लाल जी की एक वर्षीय पुत्री दीपांशु को भी बीमारी ने सोमवार की रात को ही अपना शिकार बना लिया। गांव के कई अन्य बच्चों को बुखार और शरीर में कंपकंपी की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसमें से ललऊ की पुत्री ललिता (नौ) की मंगलवार की शाम इलाज के दौरान मौत हो गई।

लेड़ियारी प्रतिनिधि के अनुसार कोरांव ब्लाक के ही नीबी गांव में गीता देवी (15) पुत्री रणधीर कुमार की भी मंगलवार को बुखार से मौत हो गई। बदौना कला की रहने वाली गीता नीबी में अपने मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रही थी। आखिर यह कैसा बुखार है कि एक दिन में ही बच्चे मौत के शिकार हो रहे हैं। इलाज तक का मौका नहीं मिल पा रहा है। इस अनजाने बुखार से हो रही मौत से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।

वहीं बच्चों की मौत की सूचना पाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम मंगलवार की सुबह गांव पहुंची जरूर, लेकिन खानापूर्ति करके वापस लौट आई। कोरांव सीएचसी के अधीक्षक डा. राजेश ने तो इसके पीछे फूड प्वाइजनिंग का मामला कहकर इतिश्री कर ली। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

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ये हैं बीमारी के शिकार मासूम

नीरज (3) पुत्र संतलाल-बढ़वारी कला-कोरांव

अमरेश (4) पुत्र राधेश्याम-बढ़वारी कला-कोरांव

पिंकी (3) पुत्री तौलन-बढ़वारी कला-कोरांव

रोशनी (3) पुत्री किशोरी लाल-बढ़वारी कला-कोरांव

रनिया (1 माह) पुत्री मिठाईलाल-बढ़वारी कला-कोरांव

दीपांशु (1) पुत्री लालजी-धाव-कोरांव

ललिता (9) ललऊ-धाव-कोरांव

गीता देवी (15)पुत्री रणधीर कुमार-नीबी -कोरांव

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बढ़वारी कला गांव में बीमारी की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी गई थी। इसमें डॉ. उमेश कुमार व डॉ. अनिल विद्यार्थी और कुछ स्टाफ शामिल थे। डॉक्टरों ने जो रिपोर्ट मुझे सौंपी है, उसके मुताबिक गांव में तीन बच्चों की मौत हुई है। एक बच्चे के पेट में सूजन थी तथा दो अन्य को उल्टी दस्त व बुखार की शिकायत थी। अगर बीमारी से और मौतें हुई हैं तो इसका पता लगाया जा रहा है। मामले में अगर डॉक्टरों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वैसे बुधवार को शहर से स्वास्थ्य विभाग की एक टीम प्रभावित गांवों में भेजी जाएगी।

डॉ. पदमाकर सिंह, सीएमओ इलाहाबाद

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घटना की जानकारी मुझे नहीं है। अगर बच्चों की मौत हुई तो फिर यह गंभीर मामला है। सीएमओ ने मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। अगर ऐसी कोई बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी।

डॉ. आभा श्रीवास्तव, अपर निदेशक स्वास्थ्य

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कोरांव में बच्चों की मौत की जानकारी मिली है। मामले को लेकर सीएमओ को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। बुधवार को एक टीम प्रभावित गांवों में भेजी जाएगी जो सच्चाई का पता लगाएगी। अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पी गुरुप्रसाद, जिलाधिकारी इलाहाबाद