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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पराली से बिजली, किसानों की पौ बारह

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Published: Wed, 20 Mar 2013 06:33 PM (IST)Updated: Wed, 20 Mar 2013 06:34 PM (IST)

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अमृत सचदेवा, फाजिल्का

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में बिजली संकट दूर करने के लिए पराली से 800 मैगावाट बिजली बनाने का का एलान किया गया है। इस योजना से मालवा के धान उत्पादक क्षेत्रों के उन किसानों की पौ बारह हो गई है, जो पराली को ठिकाने लगाने को अब तक प्रति एकड़ हजारों रुपए खर्च करते थे। लेकिन अब उन्हें उस कूड़े से भी अच्छी आमदन होने लगेगी।

इस योजना पर खुशी जताते हुए जमींदारा फार्मसाल्यूशंस के निदेशक विक्रम आदित्य आहूजा, जोकि पिछले करीब चार साल से पराली जलाने की बजाय उसे बेचकर मुनाफा कमाने के लिए किसानों को प्रेरित करने का काम कर रहे हैं, ने कहा कि इस मुहिम में सरकार की जिस सहायता की उम्मीद की जा रही थी, सरकार ने आठ सौ मैगावाट बिजली उत्पादन पराली से करने की घोषणा कर उसे पूरा कर दिया है।

वहीं नासा एग्रो इंडस्ट्री के संचालक इंजीनियर संजीव नागपाल ने कहा कि मालवा क्षेत्र में धान उत्पादन पूरे राज्य में सबसे ज्यादा है। पहले पराली को ठिकाने लगाने की समस्या रहती थी, लेकिन अब पराली से बिजली बनाने की योजना से किसानों को घाटे की सबब बनने वाली पराली का भी अच्छा मूल्य मिलने लगेगा।

प्रमुख किसान कैप्टन एमएस बेदी और प्रेम बब्बर ने कहा कि पराली की बिक्री से जहां किसानों को लाभ होगा वहीं बायोमास से बिजली पैदा करने के लिए मालवा क्षेत्र में स्थापित मुक्तसर की मालवा, मलोट की यूनिवर्सल और अबोहर के गांव गद्दाडोब में स्थापित पावर प्लांट में भी बिजली उत्पादन बढ़ेगा। इससे जहां उक्त कंपनियां सरकार को बिजली बेच अच्छा मुनाफा कमाएंगी वहीं बिजली संकट से निजात मिलेगी।

वहीं, उत्तराखंड में ऊर्जा पुरुष के खिताब से नवाजे गए रुड़की आईआईटी के सेवानिवृत्त प्रो. एवं फाजिल्का निवासी डा. भूपिंदर सिंह ने कहा कि जिस तरह ऊर्जा संरक्षण जरूरी है, उसी तरह प्राकृतिक संसाधनों से ऊर्जा पैदा करना भी समय की जरूरत है। राज्य सरकार आठ सौ मेगावाट बिजली उत्पादन पराली से करना चाहती है, तो यह सरकार और किसानों के साथ-साथ अरबों रुपया खर्च कर पावर प्लांट लगाने वाली कंपनियों के लिए भी अच्छे संकेत हैं।

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