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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 18, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आनंद में मदमस्त 'लाडली फौज' के जौहर देख संगत दंग

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Thu, 18 Jun 2015 09:55 PM (IST)Updated: Fri, 19 Jun 2015 11:10 AM (IST)

गुरु चरणों की पवित्र चरण स्पर्श प्राप्त धरती श्री आनंदपुर साहिब में गुरु की 'लाडली फौज' (निहंग सिंहों) ने वीरवार ...और पढ़ें

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अशोक नीर, श्री आनंदपुर साहिब : गुरु चरणों की पवित्र चरण स्पर्श प्राप्त धरती श्री आनंदपुर साहिब में गुरु की 'लाडली फौज' (निहंग सिंहों) ने वीरवार को परंपरागत वस्त्रों को धारण कर शस्त्रों से खूब 'लाड' लड़ाए। श्री आनंदपुर साहिब के 350वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोहों के दूसरे दिन निहंग सिंहों ने सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत कर दिया।

लाडली फौज के 'जरनैलों' ने हाथी, ऊंट व मदमस्त घोड़ों की सवारी कर दशम पिता की पवित्र धरती के सदियों पुराने इतिहास की याद दिला दी। नेजा (भाला), शक्ति का प्रतीक खंडा, कृपाण, खड्ग व तीर को 'पीर' मानने वाले गुरु की लाडली फौज तख्त श्री केसगढ़ साहिब में नतमस्तक हुई।

हाथियों व ऊंटों पर बैठ कर गुरु घर में हथियारों के साथ शीश झुकाया। विभिन्न निहंग सिंह संप्रदाय के मुखिया हजारों शिष्यों के साथ चौपहिया वाहनों में कड़ी सुरक्षा के बीच संगत का अभिनंदन कर रहे थे।

कड़ी सुरक्षा वाले क्षेत्र तख्त श्री केसगढ़ साहिब के मुख्य प्रवेश द्वार में प्रवेश करते ही निहंग सिंह अपने घोड़े, हाथी व ऊंट चढ़ाई पर दौड़ाते चले गए। उस समय संगत की भीड़ कम थी। कुछ निहंग सिंह भारी वाहन भी इसी क्षेत्र में ले गए और सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी देखते रह गए।

गुरु की फौज तेज रफ्तार गाडिय़ों में लटकते हुए अपने गंतव्य की ओर कूच कर रही थी। विभिन्न संप्रदायों के मुखियों को उनके शिष्यों ने सुरक्षा देने के लिए बड़ी गाडिय़ों के चारों तरफ लटक कर सुरक्षा चक्र बनाया हुआ था। दूरदराज से आए श्रद्धालु निहंग सिंहों की इस 'जिंदादिली' को देख स्तब्ध थे।

निहंग सिंहों ने अपने शस्त्रों, घोड़े, हाथी व ऊंट को भी परंपरागत आभूषणों से सजाया हुआ था। नंगे पांव कई किलोमीटर की यात्रा कर तख्त श्री केसगढ़ साहिब में पहुंचे निहंग सिंह बाद में अपने अपने डेरों में चले गए।

बख्तरबंद गाड़ी व तोपखाना भी!

परंपरागत हथियारों के साथ साथ लाडली फौज की देसी 'बख्तरबंद गाड़ी' को देख संगत हैरत में रह गई। बड़े चौपहिया वाहन के ऊपर लोहे की दो बड़ी पाइपों को लगा कर उसे 'तोपखाने' की शक्ल दे रखी थी। संगत को दर्शन दीदार यात्रा की सूचना देने के लिए एक बड़ी जीप में 'तोप' रख कर उसके आगे परंपरागत बड़े पटाखे की आवाज की जा रही थी। आधुनिक व परंपरागत हथियारों के सुमेल के बीच निहंग सिंहों की युवा पीढ़ी ने गतके के खूब करतब दिखाए।