यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
म्यांमार ने हिंसा के लिए आतंकी हमलों को कारण बताया
म्यांमार के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 अगस्त से पांच सितंबर तक आतंकियों ने कुल 59 गांवों के 6,842 घरों ...और पढ़ें

यांगून, आइएएनएस/रायटर। रोंहिग्या मुसलमानों के पलायन से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए अब म्यांमार सरकार सक्रिय हुई है। उसने राखिन प्रांत में 25 अगस्त से मूलवासियों पर हुए हमलों की जानकारी सार्वजनिक की है। बताया है कि आतंकी संगठन अराकान रोहिंग्या मुक्ति सेना (एआएसए) के कुल 97 हमलों में 36 लोग मारे गए जिनमें 13 सुरक्षा बलों के जवान हैं।
हमलों से बचाने के लिए कुल 26,747 मूलवासियों को विस्थापित करके सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। इस बीच म्यांमार की नेता आंग सान सू की ने तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन से बात की है और गलत जानकारी के आधार पर उनके उप प्रधानमंत्री के विरोध प्रदर्शन पर आपत्ति जताई है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने अल्पसंख्यकों को लेकर बिगड़ रहे हालात से जुड़े खतरों से म्यांमार को आगाह किया है।
म्यांमार के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 अगस्त से पांच सितंबर तक आतंकियों ने कुल 59 गांवों के 6,842 घरों को जलाकर राख कर दिया और आठ पुलों को विस्फोट से उड़ा दिया। इसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 371 आतंकी मारे गए। सरकार की सूचना समिति ने कहा है कि हिंसा प्रभावित इलाकों से पीडि़तों को निकालने का काम जारी है। सभी पीडि़तों को खाना और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। समिति ने विदेशी सरकारों से गलत सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपील की है। कहा है कि वे म्यांमार में शांति और स्थिरता कायम करने में मदद करें। उल्लेखनीय है कि म्यांमार की ताजा हिंसा के चलते सवा लाख से ज्यादा मुस्लिम सीमा पार करके बांग्लादेश पहुंच चुके हैं।
गलत सूचना पर भरोसा न करें : सू की
म्यांमार की नेता सू की ने राखिन प्रांत के बिगड़े हालात के लिए रोंहिग्या आबादी से संबंधित आतंकी संगठन को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि समस्या आतंकी हमलों के बाद पैदा हुई। उन्होंने रोंहिग्या मुस्लिमों के पलायन पर कुछ नहीं कहा है। सू की ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन से फोन पर कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर गलत सूचनाओं पर विश्वास नहीं किया जाए।
इस दौरान उन्होंने तुर्की के उप प्रधानमंत्री के ट्वीट पर सार्वजनिक किये गए उन सनसनीखेज फोटो का भी जिक्र किया जो वास्तव में म्यांमार के नहीं थे। बाद में गलती पता चलने पर उप प्रधानमंत्री ने ट्वीट से उन फोटो को हटाया।
