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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पनामा पेपर केसः नवाज शरीफ के बेटे हुसैन से दूसरी बार होगी पूछताछ

By Tilak RajEdited By:
Published: Tue, 30 May 2017 12:38 PM (IST)Updated: Tue, 30 May 2017 02:19 PM (IST)

जेआइटी ने लंदन और कतर में शरीफ परिवार की संपत्ति के बारे में पूछताछ करने के लिए हुसैन नवाज को बुलाने का फैसला किया है।

पनामा पेपर केसः नवाज शरीफ के बेटे हुसैन से दूसरी बार होगी पूछताछ
पनामा पेपर केसः नवाज शरीफ के बेटे हुसैन से दूसरी बार होगी पूछताछ

लाहौर, एएनआइ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बड़े बेटे हुसैन नवाज से मंगलवार को दूसरी बार पनामा पेपर्स मामले में संयुक्त जांच दल (जेआइटी) द्वारा पूछताछ की जाएगी। इससे पहले हुसैन नवाज से जेआइटी ने रविवार को लगभग ढाई घंटे तक पूछताछ की थी।

हुसैन नवाज से रविवार को जेआइटी के छह सदस्‍यों में पूछताछ की थी। लेकिन हुसैन ने टीम के दो सदस्‍यों के खिलाफ आपत्ति जाहिर की थी। हुसैन ने अपनी इस आपत्ति को सुप्रीम कोर्ट में भी जाहिर किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हुसैन की जेआइटी के दो सदस्यों के खिलाफ आपत्तियों को ठुकरा दिया।

पाक अखबार डॉन की खबर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों के कार्यान्वयन पीठ के अध्यक्ष जज एजाज अफजल खान ने कहा, 'हम जेआइटी के किसी भी सदस्य को केवल अनुमान के आधार पर नहीं हटाएंगे, जब तक कि कुछ ठोस नहीं आएगा, क्योंकि ये प्रधानमंत्री की जांच हो रही है।'

दरअसल, हुसैन ने जेआइटी के दो सदस्यों पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। बताया जा रहा है कि जेआइटी के एक सदस्य को पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपित जनरल परवेज मुशर्रफ का करीबी दोस्त माना जा रहा है। वहीं दूसरे दोस्त को पंजाब के पूर्व गवर्नर मियान अजहर का रिश्तेदार बताया जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो जेआइटी ने लंदन और कतर में शरीफ परिवार की संपत्ति के बारे में पूछताछ करने के लिए हुसैन नवाज को बुलाने का फैसला किया है। पिछले साल पनामा पेपर लीक्स में आरोप लगाया गया था कि लंदन में मरियम और उनके भाई के संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्तियों में मरियम लाभार्थी स्वामी है।

गौरतलब है कि जेआइटी का गठन बीते महीने पाक सुप्रीम कोर्ट द्वारा पनामा पेपर लीक्स के फैसले के क्रियान्वयन के लिए किया गया था। फैसले में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

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