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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हिंद महासागर की गर्मी से कमजोर हुआ मानसून

By manoj yadavEdited By:
Published: Tue, 16 Jun 2015 09:46 PM (IST)Updated: Tue, 16 Jun 2015 09:51 PM (IST)

पिछली सदी में हिंद महासागर के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने से गर्मी के दिनों में मानसूनी बारिश कम ...और पढ़ें

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वाशिंगटन। पिछली सदी में हिंद महासागर के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने से गर्मी के दिनों में मानसूनी बारिश कम हुई है। इसका असर गंगा-ब्रह्मापुत्र घाटी तथा हिमालय की तराई के अलावा भारत के मध्य-पूर्व और उत्तरी इलाके पर ज्यादा पड़ा है।

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम संस्थान, पुणे के डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कोल के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक दल ने यह निष्कर्ष निकाला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 1901-2012 के दौरान पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु की मानसूनी बारिश कम हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून 10 से 20 फीसद तक कमजोर हुआ है। "नेचर कम्युनिकेशंस" के मंगलवार को आए अंक में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है।

कोल ने बताया कि गंगा का मैदान सघन आबादी वाला क्षेत्र है। यहां की खेती मुख्यतः वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में मानसूनी बारिश में ज्यादा गिरावट होने से इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

गलत निकले पहले के निष्कर्ष

शोधकर्ताओं का कहना है कि हिंद महासागर के साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप के तापमान की बढ़ोतरी ने भी मानसून पर प्रतिकूल असर डाला है। इससे पहले के अध्ययनों में कहा गया था कि उत्तरी गोलार्द्ध की भूमि, समुद्र की तुलना में ज्यादा तेजी से गर्म हो रही है।

वैज्ञानिकों का अनुमान था कि इसके चलते मानसून और मजबूत होगा। उनका कहना था कि समुद्र के गर्म होने से स्थलीय क्षेत्र की नमी और हवा की वाष्पधारण क्षमता में वृद्धि होगी। भूमि और समुद्र के तापमान का अंतर बढ़ने से बारिश भी ज्यादा होगी। हालांकि, अध्ययन में पाया गया कि दक्षिण एशियाई मानसून के मामले में यह बात लागू नहीं होती है।