यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
तमिलों के साथ खड़ा रहेगा भारत
भारत ने श्रीलंकाई तमिलों को हमेशा उनके हित में काम करने का भरोसा दिलाया है। राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के सम्मेलन (चोगम) ...और पढ़ें

कोलंबो। भारत ने श्रीलंकाई तमिलों को हमेशा उनके हित में काम करने का भरोसा दिलाया है। राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के सम्मेलन (चोगम) में हिस्सा लेने पहुंचीं विदेश सचिव सुजाता सिंह ने बृहस्पतिवार को तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) नेताओं से मुलाकात की। विदेश सचिव ने कहा, हम श्रीलंकाई तमिलों को सम्मान और इज्जत के साथ जीने का मौका दिलाएंगे।
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हाल ही में उत्तरी प्रांत की सत्ता संभालने वाले टीएनए के नेता आर. संबनाथन ने पत्रकारों से कहा कि विदेश सचिव के साथ उनकी ढेर सारे मुद्दों पर चर्चा हुई। संबनाथन के मुताबिक भारतीय विदेश सचिव ने उनकी बातें धैर्यपूर्वक सुनी और समझीं। मनमोहन सिंह के चोगम में शिरकत न करने के फैसले को तमिल नेता ने भारतीय पीएम का निर्णय बताया।
युद्ध अपराध आरोपों की छाया में सम्मेलन आज से
कोलंबो। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके कनाडाई एवं मॉरीशस के समकक्षों की अनुपस्थिति के बीच तीन दिवसीय राष्ट्रमंडल सम्मेलन शुक्रवार से शुरू होगा। खास बात यह है कि श्रीलंका के विपक्ष ने भी सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा की है। 53 देशों के इस सम्मेलन के दौरान आतंकी संगठन लिट्टे के खिलाफ चले गृह युद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन और युद्ध अपराधों के आरोप छाए रहेंगे।
मनमोहन सिंह के सम्मेलन में न आने पर श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि वह विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के आने से ही संतुष्ट हैं। जब एक भारतीय पत्रकार ने पूछा कि मनमोहन तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं के मद्देनजर बैठक में शामिल नहीं हुए तो जवाब में राजपक्षे ने कहा कि उन्होंने मुझे यह कारण नहीं बताया।
कनाडा के पीएम स्टीफन हार्पर और मॉरीशस में उनके समकक्ष ने कोलंबो न आने के पीछे श्रीलंका के कमजोर मानवाधिकार रिकॉर्ड का उल्लेख किया था। यहां तक कि ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन ने भी कहा है कि वह कोलंबो आकर इन मुद्दों पर अपने देश का पक्ष रखना चाहते हैं। मेरे यहां आने से कोई यह न समझे कि श्रीलंका में जो कुछ हुआ उसे ब्रिटेन का समर्थन है। एक पत्रकार द्वारा कैमरन के बयान के संबंध में पूछे गए सवाल पर राजपक्षे ने कहा कि मुझे भी उनसे कई सवाल पूछने हैं। हमने बहुत कुछ खोया है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि लिट्टे ने नागरिकों के अलावा इस देश के राष्ट्रपति की हत्या भी की थी। सम्मेलन में मालदीव के संकट पर भी चर्चा होगी।
इस बीच, ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्लू) ने राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं से श्रीलंकाई नेतृत्व पर मानवाधिकार के मामले में दबाव डालने का आग्रह किया है। एचआरडब्लू एशिया के डायरेक्टर ब्रेड एडम्स ने कहा कि दुनिया की नजरें यदि वहां नेताओं ने यह मुद्दा नहीं उठाया तो दुनिया में कॉमनवेल्थ का प्रभाव नहीं रहेगा।
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