यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 23, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बांग्लादेश के साथ भारत ने की पावर डील, चीन को झटका
भारतीय सरकारी फर्म ने बांग्लादेश में 1.6 बिलियन डॉलर के कंट्रैक्ट की सहमति दे दी है, इसके साथ ही चीन को भारत की ओर से मात भी मिली है।

नई दिल्ली/ढाका। भारतीय सरकारी फर्म ने बांग्लादेश में 1.6 बिलियन डॉलर के कंट्रैक्ट की सहमति दे दी है, इसके साथ ही चीन को भारत की ओर से मात भी मिली है।
भारत मानता है कि बांग्लादेश भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा है और इस उपमहाद्वीप में चीन का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। चीन का फैलाव पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट से लेकर अफ्रीकी तट जिबूती तक हो रहा है। चीन यहां नेवी बेस बना रहा है।
वर्षों की बातचीत के बाद भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) दक्षिणी बांग्लादेश के खुलना में 1,320 मेगावॉट थर्मल पावर स्टेशन स्थापित करने के लिए 28 फरवरी को समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। करने जा रहा है। इस बात की पुष्टि नई दिल्ली और ढाका के अधिकारियों ने की है।
चीन के हार्बिन इलेक्ट्रिक इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड का ईरान, तुर्की और इंडोनेशिया समेत कई देशों में पावर प्रोजेक्ट है। बांग्लादेश के अधिकारियों ने कहा कि चीन को टेक्निकल आधार पर यहां पावर प्रोजेक्ट लगाने का मौका नहीं मिला। हालांकि बांग्लादेश-भारत फ्रेंडशिप पावर कंपनी लिमिटेड के प्रवक्ता अनवरुल अजिम ने कहा कि भेल ने सबसे कम की बोली लगायी थी।
भारतीय सरकार को विदेशों में प्रोजेक्ट के लिए कर्ज मुहैया कराने वाला एग्जिम बैंक ने (BHEL) को इस प्रोजेक्ट के लिए मदद की। वह इस प्रोजेक्ट की कुल लागत में कम ब्याज पर 70 प्रतिशत फंड मुहैया कराएगा। यह बात एक भारतीय अधिकारी ने बतायी लेकिन उन्होंने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की बात कही। एग्जिम बैंक यह कर्ज एक प्रतिशत लाइबर पर देगा। लाइबर इंटरनेशनल कर्ज देने का ब्याज मानक है।
एग्जिम बैंक के डिप्यूटी डायरेक्टर डेविड रसकिना ने कहा, ‘एग्जिम इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद सकारात्मक है। हम इसे लेकर आशान्वित हैं। हम चाहते हैं कि यह प्रोजेक्ट मुकाम तक पहुंचे।‘
भारतीय पावर फर्म का विदेश में यह सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। इससे पहले भारत रवांडा में एक पावर प्लांट बना चुका है और श्रीलंका में बनाने की तैयारी में है। बांग्लादेश में प्रोजेक्ट को हासिल करने में लगी चीनी कंपनी ने अभी तक इसपर कुछ कहा नहीं है। लेकिन हार्बिन के आफ्टर सेल सर्विस डिपार्टमेंट ने कहा, ‘कंपनी इस तरह के कई टेंडर्स में लगी हुई है। यह बहुत सामान्य सी बात है।‘
दूसरा झटका
हाल के वर्षों में भारत और चीन के बीच इस इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर होड़ बढ़ी है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छोटे पड़ोसियों के साथ संबंधों में ऊर्जा भरने की कोशिश कर रहे हैं। चीन का बांग्लादेश में प्रोजेक्ट हासिल नहीं करना दूसरा झटका है। इससे पहले जापान ने पिछले साल बांग्लादेश के पोर्ट सेक्टर से चीन को बेदखल किया था। जापान ने बांग्लादेश में समुद्र तट पर बंदरगाह बनाने के लिए 80 प्रतिशत वित्तीय मदद की। इस प्रोजेक्ट को लेकर भी चीन बांग्लादेश से बातचीत कर रहा था। भारत के प्रस्तावित पावर प्लांट की बांग्लादेश में 600 मेगावाट की दो यूनिट होगी।
