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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन का नया आरोप, सीमा में बुलडोजर लेकर घुसे थे 400 भारतीय जवान

By Manish NegiEdited By:
Published: Wed, 02 Aug 2017 04:25 PM (IST)Updated: Wed, 02 Aug 2017 09:04 PM (IST)

28 जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अपने चीनी समकक्ष यांग जिएची से बीजिंग में बात हुई थी।

चीन का नया आरोप, सीमा में बुलडोजर लेकर घुसे थे 400 भारतीय जवान
चीन का नया आरोप, सीमा में बुलडोजर लेकर घुसे थे 400 भारतीय जवान

बीजिंग, प्रेट्र/रायटर। चीन ने कहा है कि उसने डोकलाम को लेकर अपने स्पष्ट रुख से भारत को अवगत करा दिया है। संबंधों को सामान्य बनाने की ठोस कार्रवाई के तौर पर भारत डोकलाम से सेना हटाए। सीमा पर व्याप्त गतिरोध को खत्म करने के लिए कोई शर्त न जोड़ी जाए। भारत के चार सौ सैनिक बुलडोजर लेकर घुसे हैं, बावजूद इसके चीन संयम दिखा रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय ने यह बात 28 जुलाई को हुई दोनों देशों की बातचीत का ब्योरा सार्वजनिक करते हुए जारी बयान में कही है।

28 जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अपने चीनी समकक्ष यांग जिएची से बीजिंग में बात हुई थी। डोभाल ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन गए थे। रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण डोकलाम में चीन की सेना सड़क बना रही थी। भारत ने वह निर्माण रुकवा दिया और उसके बाद से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी हुई हैं। डोकलाम में यह स्थिति पिछले डेढ़ महीने से बनी हुई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने लिखित बयान में कहा है कि दोनों देशों के बीच वार्ता में जिएची ने चीन के क्षेत्र से भारतीय सेना के हटने की स्पष्ट अपेक्षा जता दी थी। वार्ता में चीन का पक्ष पहले जैसा ही था और उसमें कोई बदलाव नहीं आया। वार्ता में जिएची ने अनुरोध किया कि भारत चीन की संप्रभुता का सम्मान करे और अंतरराष्ट्रीय कानून को मानते हुए तत्काल वहां से सेना हटाए।

भारत की स्थिति विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में बहस के दौरान साफ कर दी है कि भारत की सेना तभी वापस आएगी जब चीन की भी पूर्व स्थिति में लौटेगी। इसके बाद डोकलाम की स्थिति पर दोनों देश वार्ता करेंगे। भारत सरकार ने चीन को बता दिया है कि इलाके में सड़क का निर्माण करना वहां की स्थिति में बदलाव का संदेश देगा। वह इलाका भारत, भूटान और चीन के मध्य का इलाका है। इसके स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। इस क्षेत्र से भारत के सुरक्षा हित जुड़े हुए हैं, इसलिए वह वहां पर कोई परिवर्तन नहीं चाहता है।

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