यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
भारत-पाक संबंधों के लिहाज से सबसे खराब साल रहा 2016
2016 की शुरुआत ही भारत में आतंकी हमले से हुई। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने दो जनवरी को पठानकोट स्थित एयरबेस पर हमला कर दिया।

इस्लामाबाद, प्रेट्र : भारत-पाकिस्तान के आपसी संबंधों के लिहाज से 2016 सबसे खराब सालों में से एक रहा। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के हमलों ने सालभर शांति प्रक्रिया को बाधित रखा। जवाब में भारत ने गुलाम कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की, तो सीमा पर दोनों ओर से कई दिनों तक जबर्दस्त गोलाबारी होती रही।
2016 की शुरुआत ही भारत में आतंकी हमले से हुई। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने दो जनवरी को पठानकोट स्थित एयरबेस पर हमला कर दिया। इससे नाराज भारत ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तब तक कोई बातचीत नहीं हो सकती। पिछले साल 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संक्षिप्त लाहौर यात्रा से बने सौहार्दपूर्ण माहौल के लिए भी पठानकोट हमला घातक साबित हुआ।
इससे पहले दिसंबर की शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद में आयोजित 'हार्ट ऑफ एशिया' सम्मेलन में भाग लिया था। इसके बाद जनवरी के मध्य में भारतीय विदेश सचिव को पाकिस्तान जाना था। लेकिन पठानकोट हमले के चलते शांति प्रक्रिया बाधित हो गई।
जुलाई में हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बुरहान वानी कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथों मुठभेड़ में मारा गया। उसके बाद कश्मीर में जिस तरह की अशांति हुई, उससे दोनों देशों के रिश्ते अब तक पटरी पर नहीं आ पाए हैं। कश्मीर में अशांति के इस ताजा दौर के पीछे भारत पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराता रहा। सितंबर में जैश के आतंकियों ने उड़ी में सेना के शिविर पर हमला कर दिया।
सितंबर में ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा उठाया और बुरहान वानी को युवा नेता बताया। शरीफ को करारा जवाब देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि जो लोग दूसरों पर अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
